कलेक्टर हरदा ने तत्कालीन तहसीलदार श्रीमती एक्का पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की ! 13 माह बाद भी कार्रवाई लंबित ! राजस्व मंत्री ने कहा कलेक्टर से करेंगे बात!
भोपाल/ हरदा –
हरदा कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने आवेदक मनोज धमनानी की शिकायत के मामले में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व की रिपोर्ट के उपरांत अनियमितता के मामले में तत्कालीन तहसीलदार अलका एक्का पर अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर सचिव मप्र शासन को पत्र लिखा है। आवेदक मनोज धमनानी ने फरवरी 2024 में लोकायुक्त को इस मामले की शिकायत थी।
फिलहाल इस मामले में कलेक्टर की अनुशंसा के 13 माह बीतने के बावजूद तत्कालीन तहसीलदार पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। साथ ही लोकायुक्त द्वारा भी सम्बंधित दोषियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई होने की जानकारी उपलब्ध नहीं हुई है।
15 अगस्त 2026 को इस मामले में कार्रवाई न होने के प्रश्न पर मीडिया से बात करते हुए राजस्व मंत्री करणसिंह वर्मा ने कहा कि मैं कलेक्टर हरदा से इस संबंध में बात करूंगा ।
■ क्या है कलेक्टर का पत्र –
23 जुलाई 2025 को लिखे इस पत्र में कलेक्टर हरदा ने बताया कि हरदा-खंडवा बायपास रोड पर स्थित खसरा नंबर 115/4 की भूमि पर बना ‘आदर्श वेयर हाउस’ (ग्राम खेड़ीमहमूदाबाद, तहसील हरदा वर्ष 2003-04 से आदर्श पिता महेश चंद्र वशिष्ठ के नाम पर संचालित हो रहा था। यह भूमि राजस्व रिकॉर्ड में लगातार कृषि भूमि के रूप में दर्ज थी, जबकि वास्तव में इस पर व्यावसायिक उपयोग के लिए आदर्श वेयर हाउस का निर्माण और संचालन किया जा रहा था। वर्तमान में, यह संपत्ति नगरपालिका रिकॉर्ड में सुशील चंद्र वशिष्ठ पिता स्वर्गीय ईश्वरीचंद्र वशिष्ठ के नाम पर दर्ज है। आवेदक मनोज धमनानी का आरोप है कि इस भूमि को कृषि भूमि दिखाकर राजस्व की चोरी की जा रही है और संबंधित व्यक्तियों को अनुचित लाभ पहुँचाया जा रहा है। आवेदक द्वारा इस मामले की शिकायत लोकायुक्त कार्यालय, भोपाल में भी की गई थी।
■ प्रशासनिक जांच एवं निष्कर्ष
– शिकायत प्राप्त होने पर, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), हरदा द्वारा मामले की जांच की गई।
– जांच के दौरान, राजस्व निरीक्षक, हरदा की रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा की गई।
-यह पाया गया कि खसरा नंबर 115/2 की प्रविष्टि रिकॉर्ड में दो बार की गई थी और खसरा नंबर 115/4 का निर्माण किसी भी आधिकारिक आदेश के बिना किया गया था।
– यह भी पाया गया कि भूमि के डायवर्सन (अर्थात कृषि से व्यावसायिक उपयोग में परिवर्तन) के बावजूद, कृषि खाते से संबंधित भूमि के क्षेत्रफल को कम नहीं किया गया था।
– यह त्रुटियाँ तत्कालीन राजस्व निरीक्षक श्री हरीसिंह राजपूत द्वारा की गई थीं, जिनका अब निधन हो चुका है।




