मकडा़ई एक्सप्रेस 24 बैतूल। पश्चिमी वन मंडल बैतूल के जिला कार्यालय में सोमवार को भोपाल लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की। पदोन्नति का मामला निपटाने के नाम पर 55 हजार रुपये की रिश्वत लेते डीएफओ कार्यालय में पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटर और सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।
पदोन्नति रोकने के नाम पर मांगी रिश्वत
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कंप्यूटर ऑपरेटर अभय सिंह तोमर और सहायक ग्रेड-2 माखनलाल पाल के रूप में हुई है।
जानकारी के अनुसार वन रक्षक सुकांत पाठक के खिलाफ 2023 से एक विभागीय प्रकरण लंबित था। सुकांत को पहले ही सजा मिल चुकी थी, लेकिन यही प्रकरण उनकी आगे की पदोन्नति में बाधा बन रहा था। आरोप है कि इसी मामले को खत्म कराने के एवज में दोनों कर्मचारियों ने सुकांत से 55 हजार रुपये की मांग की थी। रकम अधिकारियों तक पहुंचाने की बात भी कही गई थी।
लोकायुक्त ने ट्रैप कर की कार्रवाई
रिश्वत की मांग से परेशान वन रक्षक सुकांत पाठक ने भोपाल लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त टीम ने ट्रैप प्लान किया।
योजना के मुताबिक जैसे ही शिकायतकर्ता ने दोनों को 55 हजार की रकम दी, लोकायुक्त टीम ने उन्हें पकड़ लिया। मौके से 500 रुपये के 110 नोट बरामद किए गए। लोकायुक्त ने दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और BNS की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
गिरफ्तार बाबू का पुराना मामला भी आया सामने
इस कार्रवाई के बाद सहायक ग्रेड-2 माखनलाल पाल का एक पुराना मामला भी चर्चा में है। आरोप है कि 9 अक्टूबर 2019 को रेलवे में नौकरी लगवाने के नाम पर 5.70 लाख रुपये की ठगी की गई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार इस लेन-देन में माखन पाल की भूमिका थी। इस संबंध में 6 नवंबर 2025 को वन विभाग और एसपी को शिकायत दी गई थी, लेकिन मामला दर्ज नहीं हो सका था।
लोकायुक्त डीएसपी का बयान
लोकायुक्त भोपाल के डीएसपी कविंद्र सिंह चौहान ने बताया कि “वन विभाग के ग्रेड-2 बाबू माखन पाल और कंप्यूटर ऑपरेटर अभय सिंह तोमर के खिलाफ धारा 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 और BNS की धारा 61(2) के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया गया है। यह पूरी कार्रवाई वनरक्षक सुकांत पाठक की शिकायत पर की गई है।”
शिकायतकर्ता ने क्या कहा
वनरक्षक सुकांत पाठक ने बताया “मेरी पदोन्नति विभागीय प्रकरण के कारण रुकी थी। इसी मामले में मुझसे 55 हजार रुपये मांगे गए। मैंने लोकायुक्त में शिकायत की थी, जिसके बाद सोमवार को कार्रवाई हुई।”
विभाग में हड़कंप, जांच जारी
इस कार्रवाई के बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 55 हजार की रिश्वत किस-किस तक पहुंचाई जानी थी और क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क है। लोकायुक्त अब पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहा है। वहीं विभागीय स्तर पर भी दोनों कर्मचारियों पर कार्रवाई तय की जाएगी।

