जिला कलेक्टर, हरदा द्वारा गठित नैदानिक दल जिसमें कृषि विज्ञान केंद्र, हरदा के डॉ. मुकेश कुमार बंकोलिया, वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी (पौध संरक्षण),अनुविभागीय अधिकारी रचना पटेल प्रभारी वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी संगीता डावर, कृषि विस्तार अधिकारी गजानन गुर्जर एवं दीपेश चंद्रवंशी द्वारा विकासखंड हरदा के विभिन्न ग्रामों में सोयाबीन फसल का निरीक्षण किया गया।
दल द्वारा ग्राम अबगांव खुर्द में कृषक हरनाथ रामगोपाल, ग्राम भुवनखेड़ी में कृषक मुकेश जाट, ग्राम डमलाई में कृषक लीलाधर बैरागी, मुकेश ओझा एवं गुलाब धनगर तथा ग्राम मांगरुल में कृषक जयकिशन धनगर के खेतों का निरीक्षण किया गया। इसके अतिरिक्त नयापुरा, रातातलाई, खेड़ा एवं रेलवा में भी सोयाबीन फसल का निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान सोयाबीन फसल में पत्तियों का पीलापन, पौधों का मुरझाना, निचली पत्तियों का सूखना तथा पर्णदाग के असामान्य पानी जैसे धब्बे पाए गए। अधिक नमी की स्थिति में पत्तियां पानी में उबली हुई जैसी दिखाई देने के कारण रायजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट की संभावना को दृष्टिगत रखते हुए कृषकों को खेत की सतत निगरानी एवं समय पर रोग नियंत्रण की सलाह दी गई।
रोग के प्रारंभिक लक्षण दिखाई देने पर निम्न में से किसी एक फफूंदनाशी का प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करने की सलाह दी गई—
पायराक्लोस्ट्रोबिन + इपॉक्सीकोनाजोल @ 300 मिली/एकड़ अथवा फ्लुक्सापायरोक्सड + पायराक्लोस्ट्रोबिन @ 120 मिली/एकड़।
सफेद मक्खी एवं तना मक्खी के नियंत्रण हेतु थायमेथॉक्साम 12.60% + लेम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 9.50% ZC @ 50 मिली/एकड़ अथवा बीटा सायफ्लूथ्रिन + इमिडाक्लोप्रिड @ 140 मिली/एकड़ के छिड़काव की सलाह दी गई। जीवाणु स्फोट रोग की स्थिति में कासुगामाइसिन 5% + कॉपर ऑक्सी क्लोराइड 45% WP @ 300 मिली/एकड़ की दर से छिड़काव करने की अनुशंसा की गई।
कृषकों को निर्देशित किया गया कि कीटनाशक, फफूंदनाशी एवं जीवाणुनाशी को आपस में मिलाकर एक साथ छिड़काव न करें। कृषि रसायनों का उपयोग केवल लेबल पर अंकित निर्देशों एवं अनुशंसित मात्रा के अनुसार ही किया जाए। फसल में रोग एवं कीट के लक्षण पाए जाने पर तत्काल संबंधित कृषि अधिकारी से संपर्क कर आवश्यक नियंत्रण उपाय अपनाए जाएं।

