हरदा। शनिवार को आयोजित नेशनल लोक अदालत सिर्फ कानूनी विवाद सुलझाने का मंच नहीं, बल्कि टूटते रिश्तों को जोड़ने का जरिया भी बनी। छह साल से अलग रह रहे एक दंपत्ति के बीच अदालत में समझाइश के बाद सुलह हो गई और दोनों फिर से साथ रहकर वैवाहिक जीवन बिताने को राजी हो गए।
यह मामला इस लोक अदालत की सबसे बड़ी उपलब्धि रहा, जिसमें कानूनी विवादों के साथ-साथ रिश्तों में आई दूरियों को बातचीत से खत्म करने का प्रयास किया गया।
जिले में 15 खंडपीठों पर हुई सुनवाई
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष अरविंद रघुवंशी की मौजूदगी में जिला न्यायालय हरदा में लोक अदालत का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके साथ ही व्यवहार न्यायालय खिरकिया और टिमरनी में भी लोक अदालत का आयोजन हुआ।
जिले में कुल 15 खंडपीठ गठित की गई थीं, जिनमें 14 न्यायालय की और एक उपभोक्ता फोरम की खंडपीठ शामिल थी। जिले में आयोजित नेशनल लोक अदालत में कुल 2,077 प्रकरणों का निराकरण किया गया।
छह साल बाद फिर शुरू होगा दांपत्य जीवन
जानकारी के अनुसार पति-पत्नी के बीच विवाद के चलते दोनों छह साल से अलग रह रहे थे। पत्नी ने भरण-पोषण राशि के लिए कुटुंब न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत किया था। लोक अदालत में न्यायालय की समझाइश और सुलह-वार्ता के बाद दोनों ने मतभेद भुलाकर साथ रहने की सहमति दी। प्रकरण का निराकरण करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रघुवंशी ने दोनों को फलदार पौधे भेंट कर विदा किया।
लोक अदालत में ऐसे कई मामले आए जहां दोनों पक्ष विवाद समाप्त करने के लिए राजी हुए। राजीनामा के बाद प्रकरण समाप्त होने पर पक्षकारों को स्मृति स्वरूप फलदार पौधे भेंट किए गए।
885 लंबित मामलों में हुआ समझौता, 5 करोड़ से ज्यादा के अवॉर्ड पारित
खंडपीठों के माध्यम से सुलह-समझौते के आधार पर 885 लंबित प्रकरणों का निराकरण किया गया। इनमें कुल 5 करोड़ 12 लाख 34 हजार 26 रुपये के अवॉर्ड पारित हुए। इससे 1,770 पक्षकारों को सीधा लाभ मिला।
वहीं प्री-लिटिगेशन स्तर पर 1,192 प्रकरणों का निराकरण हुआ। इसमें 1 करोड़ 12 लाख 38 हजार 656 रुपये की वसूली की गई और 2,384 लोग लाभान्वित हुए।

