मिशन सौ करोड़ के राजेद्र माहेश्वरी ने पीएम और सीएम को पत्र लिख की मांग
विगत 10 वर्षो से लगातार समाजसेवियों द्वारा आई बैंक की मांग की जा रही है अभी तक सरकार की ओर से कोई सकारात्मक उत्तर नही मिला है। पूर्व में सभी कलेक्टर से भी मांग की गई थी उन्होने भी शासन को अवगत कराया था।
मकड़ाई समाचार हरदा। ये आंखे देखकर हम हम सारी दुनिया भूल जाते हैं,, इस प्रकार के न जाने कितने ही गाने हम आंखो के सुनते आए है।हमारे आस पास हमने कई लोग देखे होगें जो जन्म से अंधे होते है या किसी दुर्घटना या चोट लगने के बाद आंखो की रोशनी खो देते है।अपने जीवन में इस अंधेरे से उन्हे पल पल लड़ना पड़ता है।इसका विकल्प है किसी व्यक्ति द्वारा नेत्रदान किया जाए और नेत्रहीन व्यक्ति पर नेत्र प्रत्यारोपण किया जाए तो उसके जीवन का अंधकार मिट सकता है। नेत्रदान के संबंध में जिले मे बहुत से लोगो ने भगीरथी प्रयाय किए और उन्होेने सफलता भी पाई है,लेकिन अभी जिला चिकित्सालय मे नेत्रदान की व्यवस्था नही हो पाई है।विगत एक दशक से यहां पर आई बैंक की मांग उठती जा रही है।एक सच यह भी है कि हमारे देश में करीब 1 करोड़ 30 लाख लोग अंधकारमय जीवन जी रहे है।इनमें से करीब 30 लाख लोग प्रत्यारोपण के माध्यम से इस दुनिया को देख सकते मगर नेत्रदान की व्यवस्थाएं न होने से लोग नेत्रदान नही कर पा रहे है।
नेत्रदान में लोगो ने दिखाई थी रुचि
जिले में वर्ष 2011से 2015 के दौरान मनोहर अग्रवाल गर्ग के अथक प्रयास से लोगो ने नेत्रदान करने की इच्छा जाहिर कि थी।इस दौरान श्री अग्रवाल ने एक सैंकडा से अधिक लोगो के नेत्रदान कराए थे। जिले में आई बैंक न होने से लोग अगर नेत्र दान करना भी चाहे तो नही कर पा रहे है। जिले में आंखों के सरकारी डाक्टर ओर आई बैंक की विगत कई सालो से कमी चली आ रही। 2015 मे श्री गर्ग मामा का निधन हो जाने के बाद से न तो कोई संस्था या व्यक्ति आगे आये। जिला सरकारी चिकित्सालय मे भी आज भी नेत्रदान की कोई व्यवस्था नही है।बावजूद इसके जिले के कई लोगो ने नेत्रदान किए है।
माहेश्वरी ने की आई बैंक की मांग
मिशन सौ करोड़ के राजेंद्र माहेश्वरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं प्रदेश के मुखिया शिवराजसिंह चैहान को पत्र लिखकर जिला चिकित्सालय में आंखो के डाक्टर और आई बैंक की कमी बताते हुए जल्द आई बैंक और नेत्र रोग चिकित्सक की मांग की है।इससे जिले के लोग नेत्रदान को प्रेरित होगें साथ जिले से लगे दूसरे जिले के लोग भी यहां पर आकर नेत्रदान कर सकेेगें।एक नेत्रदान से न जाने कब किसके जीवन का अंधेरा मिट जाये और उसके जीवन में खुशियों रोशन हो जाए।नेत्ररोपण केवल मृत्यु के बाद ही हो सकता है।स्वस्थ्य व्यक्ति को नेत्ररोपण किया जाता है इसके लिए उनकी आंखो की पुतलिया और नेत्र संबधित नसे स्वस्थ्य होना जरुरी होता है। आज देश में मरने वालो की 80 लाख मृतकों पर मात्र 15000 लोगो के नेत्रदान हुए है।ये बहुत ही सोचनीय विषय है।हमारे देश में नेत्रदान के लिए जागरुकता की भारी कमी है।सबसे ज्यादा शर्म और दुर्भाग्यपूर्ण बात तो यह है कि हमारे देश में श्रीलंका से बड़ी मात्रा दान किए ने़त्र आते है।
आपके नेत्रदान से रोशन होगा किसी का जीवन
नेत्रदान के लिये उम्र एवं धर्म का कोई बन्धन नही हैं।आपके नेत्रदान से किसी का अंधकारमय जीवन रोशन हो सकेगा वह आपकी आंखो से दुनिया देखेगां। नेत्रदान चश्मा पहननेवाले या जिनका मोतीयाबिंद का आपरेशन हो चुका हो ऐसे व्यक्ति भी नेत्रदान कर सकते हैं। केवल वही व्यक्ति जो एड्स, पीलिया या पुतलियों संबधीं रोगो से पीडित हो वह नेत्रदान नही कर सकते।परंतु इन सबका फैसला नेत्र विशेषज्ञ द्वारा ही लिया जाना चाहिये क्यौंकि ऐसे नेत्र अनुसंधान के काम में आ सकते हैं।किसी दुर्घटना में यदि पुतलियां ठीक हो तो उच्च तकनीकि युक्त अस्पताल में पुलिस की अनुमति से नेत्रदान जरुर किया जा सकता है।नेत्रदान मृत्यु के बाद 3 या 4 घंटे के अन्दर होना चाहिए। असाधारण परिस्थिति में 6 घंटे तक नेत्रदान हो सकता है।नेत्रदान में समय सीमा का बहुत महत्व है। आप अपने रिश्तेदार,मित्रों एंव पडोसियों से अपनी नेत्रदान करने की इच्छा की चर्चा कर सकते हैं। इससे आपकी इच्छा पूरी होने की संभावना बढ़ जाती है एंव सामाजिक जागरुकता भी आती है।संबधियों की इच्छा पर भी नेत्र बैंक के विशेषज्ञ को बुलाकर नेत्रदान किया जा सकता है।नेत्र बैंक के टेलिफोन नं. अपने घर एंव आफिस में रखें और ऐसी जगह पर लिखे जहां पर आसानी से मिल जाए।

