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बहुत कम समय के लिए आता है जामुन, औषधीय गुणों से भरपूर

भोपाल। इन दिनों जामुन की बहार है। यह फल मानसून के साथ ही अपनी दस्तक देता है। कसैले और खट्टे-मीठे स्वाद के साथ जामुन में कई औषधीय गुणों से भी भरपूर है। जामुन शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और मधुमेह को भी नियंत्रित करता है। इस लिहाज से यह कोरोनाकाल में बहुत उपयोगी है। इसे काला जामुन, राजमन और अंग्रेजी में ब्लैक बैरी भी कहा जाता है। जामुन में लौह और फॉस्फोरस तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसमें कोलीन और फोलिक एसिड भी होता है। इसका सेवन करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी कि इम्यूनिटी मजबूत होती है। इस लिहाज से कोरोनाकाल में यह बहुत ही उपयोगी है।

हृदय, त्वचा, दांतों के लिए फायदेमंद

आहार एवं पोषण विशेषज्ञ निधि पांडे बताती हैं कि जामुन में पिगमेंट्स होते हैं जिसकी वजह से इसे रंग मिलता है उसे एंथोसाइनिन कहते हैं। यह एक तरह से एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। हीमोग्लोबिन बढ़ाता है क्योंकि इसमें एस्ट्रिंजेंट प्रॉपर्टी होती है। यह त्वचा के लिए बहुत लाभकारी होता है। हृदय के लिए अच्छा होता क्योंकि खराब कॉलेस्ट्रॉल को हटाता है। जामुन में पोटेशियम भी बड़ी मात्रा में होता है। जामुन के बीज के पाउडर का उपयोग मधुमेह नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। जामुन की पत्तियों को चबा कर खाने से दांत और मसूड़े साफ हो जाते है।

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संक्रमण रोकने में मददगार

जामुन में बैक्टीरियारोधी और संक्रमणरोधी तत्व होते हैं। इसमें मैलिक एसिड, टैनिन्स, गैलिक एसिड, ऑग्जेलिक एसिड भी पाया जाता है। इसलिए जो लोग जामुन का सेवन करते हुए उन्हें बहुत जल्दी संक्रमण नहीं होता। यूरिनेशन को भी नियंत्रित करता है। इसका ग्लाइसिमिक इंडेक्स बहुत कम होता है, जिसके कारण यह शरीर में शर्करा का स्तर नहीं बढ़ने देता। अमूमन कोई भी फल खाने पर शुगर लेवल जिस तेजी से और जिस मात्रा में बढ़ता है, उसे ग्लाइसिमिक इंडेक्स कहते हैं।

जामुन के गुण

आयुर्वेद के मुताबिक जामुन की गुठली, छाल, रस और गूदा सभी मधुमेह में बेहद फायदेमंद हैं। जामुन की गुठली संभालकर एकत्रित कर लें। इसके बीजों में जाम्बोलिन नामक तत्व पाया जाता है, जो स्टार्च को शर्करा में बदलने से रोकता है। गुठली का बारीक चूर्ण बनाकर रख लेना चाहिए। दिन में दो-तीन बार, तीन ग्राम की मात्रा में पानी के साथ सेवन करने से शुगर की मात्रा कम होती है।