उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में भड़की हिंसा का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। सर्वोच्च अदालत ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई करने का फैसला किया है। यह अहम सुनवाई गुरुवार को होगी। वहीं किसानों की मौत पर खड़ी हुई वोटों की फसल काटने के लिए विपक्ष का हर नेता लखीमपुर जाना चाहता है। राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा के बाद अब अखिलेश यादव और सतीष चंद्र मिश्र की बारी है। ये दोनों नेता आज लखीमपुर जाने की कोशिश करेंगे। आशंका जताई जा रही है कि इस दौरान भी भारी हंगामा हो सकता है।
अब तक की जानकारी के मुताबिक, शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर अपलोड की गई मामले की सूची के अनुसार, सीजेआई एनवी रमना, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की 3 न्यायाधीशों की पीठ मामले की सुनवाई करेगी।
जानिए क्या है लखीमपुर खीरी हिंसा कांड
बीते रविवार को लखीनपुर खीरी में एक एसयूवी से चार किसानों को कुचल देने का मामला सामने आया था। बताया गया कि जब किसान केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे, तब एक समूह ने यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के खिलाफ प्रदर्शन किया था। इसी दौरान यह घटना हुई। गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने दो भाजपा कार्यकर्ता और एक ड्राइवर की कथित तौर पर पीट-पीट कर हत्या कर दी, जबकि हिंसा में एक स्थानीय पत्रकार की भी मौत हो गई।
मामले में तिकोनिया थाने में शिकायत दर्ज करवाई गई। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा व अन्य के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 (हत्या) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है लेकिन अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। किसान नेताओं ने दावा किया है कि आशीष उन कारों में से एक में थे, जिसने कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों को नीचे गिराया था, लेकिन मंत्री ने आरोपों से इनकार किया है।

