हंडिया के शासकीय रास्ते पर अतिक्रमण की शिकायत लेकर भटक रहे सचिन तिवारी ने कहा—जमीन की नहीं, अब रिपोर्टों की भी जांच जरूरी
हंडिया। बस स्टैंड क्षेत्र में शासकीय रास्ते पर अतिक्रमण को लेकर शुरू हुआ मामला अब केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं रह गया है। CM हेल्पलाइन की एक ही शिकायत में 13 दिन के अंतर से सामने आई दो विभागीय रिपोर्टों ने शिकायतकर्ता सचिन तिवारी के सामने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। श्री तिवारी का कहना है कि वे लगातार अधिकारियों के समक्ष शिकायत और आवेदन दे रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक ऐसा स्पष्ट जवाब नहीं मिला, जिससे मौके की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
मामला CM हेल्पलाइन शिकायत क्रमांक 38457465 से जुड़ा है। शिकायत के निराकरण में 7 अगस्त 2026 की रिपोर्ट में खसरा नंबर 98 के शासकीय रास्ते के दोनों ओर दुकानदारों द्वारा सामग्री रखकर अस्थायी अतिक्रमण किए जाने का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट में संबंधित दुकानदारों को सूचना पत्र दिए जाने की बात भी सामने आई।
इसके बाद 20 अगस्त 2026 की रिपोर्ट में उसी रास्ते को पूरी तरह खुला और अतिक्रमण मुक्त बताया गया। यहीं से शिकायतकर्ता के सवाल और गंभीर हो गए।
13 दिन में आखिर क्या कार्रवाई हुई?
सचिन तिवारी का कहना है कि यदि 7 अगस्त को शासकीय रास्ते पर अतिक्रमण पाया गया था, तो 20 अगस्त तक ऐसी कौन-सी कार्रवाई हुई, जिसके आधार पर रास्ते को अतिक्रमण मुक्त घोषित कर दिया गया?
क्या इस अवधि में दोबारा मौके का निरीक्षण हुआ?
क्या अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का पंचनामा बनाया गया?
क्या संबंधित दुकानदारों द्वारा वास्तव में सामग्री हटाई गई?
और यदि कार्रवाई हुई तो उसके दस्तावेज कहां हैं?
तिवारी का कहना है कि इन सवालों का स्पष्ट जवाब मिलने के बजाय मामला अलग-अलग स्तर पर घूमता नजर आ रहा है।
खसरा 98 या 89/2—मौके पर स्थिति क्या है?
मामले में एक अन्य महत्वपूर्ण बिंदु खसरा नंबर 98 और खसरा नंबर 89/2 से जुड़ा है। शिकायतकर्ता की मांग है कि राजस्व अभिलेखों के आधार पर मौके का निष्पक्ष सीमांकन कराया जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि संबंधित रास्ते की वास्तविक स्थिति क्या है।
उनका कहना है कि जब तक राजस्व रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान नहीं होगा, तब तक अतिक्रमण संबंधी विवाद का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
अब शिकायतकर्ता की मांग—जवाब नहीं, मौके की जांच चाहिए
लगातार शिकायतों के बाद सचिन तिवारी ने अब मामले में स्वतंत्र मौके का निरीक्षण, सीमांकन, पंचनामा और दोनों विभागीय रिपोर्टों की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जांच ऐसे अधिकारी से कराई जाए, जो पूर्व में किए गए निराकरण से सीधे तौर पर जुड़ा न हो।
साथ ही यह भी मांग की गई है कि 7 अगस्त की रिपोर्ट में जिन दुकानदारों के संबंध में अतिक्रमण का उल्लेख किया गया था, उन्हें जारी सूचना पत्र, मौके के निरीक्षण की रिपोर्ट, पंचनामा और 20 अगस्त की रिपोर्ट के आधार की जांच की जाए।
अब असली सवाल अतिक्रमण से आगे बढ़ चुका है
इस पूरे मामले में अब सवाल केवल यह नहीं है कि रास्ते पर अतिक्रमण है या नहीं। सवाल यह भी है कि एक ही शिकायत में 7 अगस्त को जिस स्थिति का उल्लेख किया गया, वह 20 अगस्त तक किस प्रक्रिया के तहत बदल गई?
यदि अतिक्रमण वास्तव में हटाया गया तो उसकी कार्रवाई का रिकॉर्ड सामने आना चाहिए। यदि मौके पर अतिक्रमण था ही नहीं, तो 7 अगस्त की रिपोर्ट में उसका उल्लेख किस आधार पर किया गया—यह भी जांच का विषय है।
सचिन तिवारी का कहना है कि वे लंबे समय से इस मामले को लेकर परेशान हैं और चाहते हैं कि अब विभागीय स्तर पर गोलमोल जवाब के बजाय मौके की वास्तविक स्थिति और सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर स्पष्ट निर्णय सामने आए।
अब देखना यह है कि संबंधित प्रशासन दोनों रिपोर्टों के अंतर को रिकॉर्ड के आधार पर स्पष्ट करता है या शिकायतकर्ता को जवाब के लिए अभी और चक्कर लगाने पड़ेंगे।

