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भारत की डिफेंस में बड़ी छलांग: अमेठी में बनी 100% स्वदेशी AK-203 ‘शेर’, INSAS की लेगी जगह

कोरवा ऑर्डनेंस फैक्ट्री में एक भी विदेशी पुर्जा नहीं, सफल फायरिंग ट्रायल पूरा, अब हर 100 सेकंड में बनेगी एक राइफल

मकडा़ई एक्सप्रेस 24 नई दिल्ली। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत मिशन को बड़ी कामयाबी मिली है। उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के कोरवा स्थित इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (IRRPL) फैक्ट्री में AK-203 असॉल्ट राइफल का पूरी तरह स्वदेशी वर्जन तैयार कर लिया गया है। इस राइफल को भारतीय सेना में *’शेर’* नाम दिया गया है।

खास बात यह है कि इस नई ‘शेर’ राइफल में एक भी पुर्जा या कच्चा माल विदेश से नहीं मंगाया गया है। कोरवा में इसका सफल फायरिंग ट्रायल भी हो चुका है, जिसमें ऑटोमैटिक और बर्स्ट मोड में करीब 3000 राउंड फायरिंग की गई।

INSAS की जगह अब ‘शेर’ की दहाड़

भारतीय सेना पिछले 3 दशक से INSAS राइफल का इस्तेमाल कर रही थी। अब उसकी जगह AK-203 ‘शेर’ लेगी। यह 7.62x39mm कैलिबर की गैस ऑपरेटेड राइफल है जो 1 मिनट में 700 राउंड फायर कर सकती है और 800 मीटर तक सटीक वार करती है। यह INSAS से ज्यादा घातक, हल्की और खराब मौसम में भी बिना रुके चलने वाली है।

नॉक-डाउन किट से 100% स्वदेशी तक का सफर

भारत ने 2019 में रूस के साथ 6,01,427 राइफलों के लिए करीब 5100 करोड़ रुपये की डील की थी। 2021 में IRRPL कंपनी बनी।

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– शुरुआत में 2024 में सेना को दी गई 35,000 राइफलों में सिर्फ 5% स्वदेशी कंटेंट था।

– 2025 में यह बढ़कर 50% हो गया।

– अब 25 अगस्त 2026 को पहली बार 100% भारतीय पुर्जों से बनी ‘शेर’ तैयार हुई है।

IRRPL के CEO मेजर जनरल एस के शर्मा के मुताबिक AK-203 में 50 मुख्य पुर्जे और 180 छोटे सब-कंपोनेंट्स होते हैं और इसे 121 प्रोसेस से गुजरना पड़ता है। बैरल, बोल्ट, फायर कंट्रोल सिस्टम सबके लिए भारतीय वेंडर तैयार कर लिए गए हैं।

उत्पादन क्षमता – हर महीने 12,000 राइफलें

फिलहाल कोरवा प्लांट में हर 100 सेकंड में 1 राइफल बन रही है। कंपनी अब तक सेना को 48,000 राइफलें दे चुकी है जो LAC, LoC पर तैनात हैं। दिसंबर 2026 तक 70,000 राइफलें देने का लक्ष्य है।

2027 से प्लांट दो शिफ्ट में चलेगा। तब रोजाना 600, हर महीने 12,000 और सालाना 1.5 लाख राइफलों का उत्पादन होगा। 2030 तक सेना को सभी 6 लाख राइफलें मिल जाएंगी, जो तय समय 2032 से 2 साल पहले है।