जिंदल कोल ब्लॉक जनसुनवाई विवाद फिर भड़का
मकड़ाई एक्सप्रेस 24 रायगढ़। तमनार क्षेत्र में जिंदल उद्योग को आवंटित गारे–पेलमा सेक्टर-1 कोल ब्लॉक को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर उग्र हो गया है। भू-अधिग्रहण और प्रस्तावित उत्खनन परियोजना के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में हुई जनसुनवाई के बाद अब गांवों में माहौल और गरम हो गया है।
ग्रामीणों का खुला विरोध – समर्थकों को पहनाई जूतों की माला
जनसुनवाई के समर्थन में सामने आए लोगों के खिलाफ ग्रामीणों ने आक्रोश प्रकट करते हुए जूतों की माला पहनाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें महिलाओं सहित कई लोगों को भीड़ द्वारा जूतों की माला पहनाकर घुमाया गया। ग्रामीणों का कहना है कि बिना सहमति के जनसुनवाई कराना उनके अधिकारों का सीधे-सीधे उल्लंघन है।
अचानक स्थल परिवर्तन से भड़के ग्रामीण
8 दिसंबर 2025 को होने वाली जनसुनवाई को लेकर तमनार क्षेत्र के 14 गांव लंबे समय से विरोध जता रहे थे। ग्रामीण धौराभांठा स्कूल मैदान में रतजगा कर प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अचानक स्थल बदल दिया और जनसुनवाई बाजार क्षेत्र में आयोजित कर दी।
अचानक हुए इस बदलाव ने ग्रामीणों का गुस्सा और बढ़ा दिया। उनका आरोप है कि प्रशासन ने उनकी आवाज दबाने और जनसुनवाई को औपचारिकता में बदलने की कोशिश की।
ग्रामीणों का आरोप – “हमारी जमीन और हितों को नुकसान”
ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना के कारण उनकी जमीन, रोजगार और पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि बिना उनकी अनुमति और विपक्ष की बात सुने जनसुनवाई आयोजित की गई। वहीं प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा को देखते हुए स्थल बदला गया था और प्रक्रिया कानूनन तरीके से पूरी की गई।
मंच से मुख्यमंत्री और मंत्री के खिलाफ अपशब्द, विवाद बढ़ा
इसी विवाद के बीच पहले धौराभांठा में हुई एक सभा में विरोध कर रहे एक युवक ने मंच से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, वित्त मंत्री ओपी चौधरी और जिला प्रशासन पर अपशब्दों का इस्तेमाल किया था। इस वीडियो के सामने आने के बाद राजनीतिक तनाव बढ़ गया है।
भाजपा नेताओं ने इस व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
स्थिति अभी भी तनावपूर्ण
तमनार क्षेत्र में ग्रामीणों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। विरोध प्रदर्शनों और वायरल वीडियो के बाद पुलिस सतर्क है। फिलहाल प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है, जबकि ग्रामीण जनसुनवाई को निरस्त करने और पुनः सहमति के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

