jhankar
ब्रेकिंग
हरदा में कचरे के ढेर में मृत गौवंश मिलने से हंगामा सागर- जहरीली शराब कांड के मुख्य आरोपी का हाफ एनकाउंट ग्वालियर में हिस्ट्रीशीटर की गोली मारकर हत्या इंदौर में BJP नगर अध्यक्ष ने घुमाई बनेठी  सुमित मिश्रा ने डोल ग्यारस पर दिखाया पारंपरिक कौशल गंदी नालियों और बदबू से परेशान चारूवा के वार्ड 11-12 के बाशिंदे विधायक अभिजीत शाह ने किए गणेश जी के दर्शन डोल ग्यारस पर 5 विमान निकले, जगह-जगह ग्रामीणो ने की पुष्प वर्षा सेवा संकल्प अभियान- संकुल स्तरीय प्रतियोगिता में 72 विद्यार्थियों ने दिखाया हुनर हरदा: साल्याखेड़ी में ट्यूबवेल की चपेट में आया 12 साल का मासूम, करंट लगने से मौत खनन माफिया का कहर ड्यूटी पर तैनात वन रेंजर को डंपर ने 50 मीटर घसीटा हुई दर्दनाक मौत

मध्य प्रदेश में एक बार फिर महंगी हो सकती है बिजली

भोपाल। मप्र में एक बार फिर बिजली महंगी हो सकती है। प्रदेश की तीनों बिजली कंपनियां मप्र विद्युत विनियामक आयोग को बिजली की दरें (टैरिफ) बढ़ाने की याचिका दायर करने की तैयारी कर रही हैं। दरअसल प्रदेश की बिजली कंपनियां अपना लइन लॉस कम नहीं कर पा रही हैं। इससे कंपनियों का घाटा भी कम नहीं हो पता है। इससे कंपनियों का घाटा बढ़ता है और टैरिफ में इजाफा हो जाता है। पिछली बार बिजली कंपनियों की मांग पर आयोग ने हर संक्टर के बिजली बिलों में इजाफा कर दिया था। घरेलू, गैर घरेलू, उद्योग, नगर निगम, नगर पंचावत से लेकर कृषि उपभोक्ताओं तक के टैरिफ में इजाफा हुआ था।

गौरतलब है कि बिजली कंपनियों द्वारा हर साल नवंबर-दिसंबर में टैरिफ याचिका मप्र विद्युत विनियामक आयोग में दायर की जाती है। याचिका पर सुनवाई के बाद मप्र विद्युत विनियामक आयोग बिजली का टैरिफ तय करता है। मप्र में बिजली के टैरिफ में एक बार फिर इजाफा हो सकता है। प्रदेश की बिजली कंपनियों की ओर से अगले महीने टैरिफ याचिका मप्र विद्युत विनियामक आयोग में दायर की जा सकती है। इसके बाद याचिका पर दावे-आपत्तियां बुलाई जाएंगी। दावे-आपत्तियों की सुनवाई के बाद बिजली के टैरिफ में अगले साल एक अप्रैल से बदलाव होगा।

पिछली बार दरों में 3.46 फीसदी का इजाफा

- Install Android App -

बिजली का नया टैरिफ हर साल 1 अप्रैल की लागू हो जाता है। पिछले साल प्रदेश की बिजली कंपनियों ने 4 हजार करोड़ से अधिक का घाटा बताते हुए बिजली के टैरिफ में 7.52 फीसदी इजाफा करने की मांग की थी। मप्र विद्युत विनियामक आयोग ने बिजली कंपनियों की इस मांग को स्वीकार नहीं किया था। आयोग ने बिजली की दरों में 3.46 फीसदी का इजाफा किया है। दरअसल प्रदेश की बिजली कंपनियां अपना लइन लॉस कम नहीं कर पा रही हैं। इससे कंपनियों का घाटा भी कम नहीं हो पता है। इससे कंपनियों का पाटा बढ़ता है और टैरिफ में इजाफा हो जाता है। पिछली बार बिजली कंपनियों की मांग पर आयोग ने हर संक्टर के बिजली बिलों में इजाफा कर दिया था। घरेलू, गैर घरेलू, उद्योग, नगर निगम, नगर पंचावत से लेकर कृषि उपभोक्ताओं तक के टैरिफ में इजाफा हुआ था। घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के टैरिफ में प्रति यूनिट 19 पैसे, गैर घरेलू उपभोक्ताओं के टैरिफ में प्रति यूनिट 20 पैसे और कृषि उपभोक्ताओं के टैरिफ में प्रति यूनिट 7 पैसे तक का इजाफा किया गया था। इतना ही नहीं बिजली कंपनियों की मांग पर आयोग ने फिक्स चार्ज में भी इजाफा किया था। चुनावी वर्ष 2024 में बिजली के टैरिफ में मामूली इजाफा हुआ था। बिजली कंपनियों ने 2 हजार करोड़ से अधिक का घाटा बताते हुए टैरिफ में 3.86 फीसदी इजाफा करने की मांग की थी। आयोग ने टैरिफ में 0.7 फीसदी का इजाफा किया था।

समाधान योजना में 58 करोड़ 61 लाख का सरचार्ज माफ

मप्र सरकार की समाधान योजना 2025-26 में कपनी कार्यक्षेत्र में अब तक 95 हजार 351 बकायादार उपभोक्ताओं ने पंजीयन कराकर लाभ लिया है। मध्य क्षेत्र विद्युत कंपनी के खाते में 107 करोड़ 98 लाख से अधिक की मूल राशि जमा हुई है, जबकि 58 करोड़ 61 लाख का सरचार्ज माफ किया गया है। मध्य प्रदेश सरकार की समाधान योजना 2025-26 के लागू होने से ऐसे अनेक उपभोक्ता है, जो बकाया बिल जमा कर रहे हैं और एकमुश्त बकाया जमा राशि जमा करने पर अधिकतम छूट का लाभ ले रहे हैं। कंपनी के प्रबंध संचालक क्षितिज सिंघल ने कंपनी के बकायादार उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे प्रथम चरण में ही एकमुश्त भुगतान कर इस योजना में शामिल होकर सरचार्ज में अधिकतम छूट का लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि यह योजना उन बकायादार उपभोक्ताओं के लिए वरदान बनी है जो सरचार्ज के कारण मूलधन राशि जमा नहीं कर पा रहे थे। अब उन्हें समाचान योजना के प्रथम चरण में सरचार्ज में 60 से लेकर 100 प्रतिशत तक छूट के साथ एकमात अथवा किस्तों में भुगतान करने का विकल्प मिल रहा है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी अपने कार्यक्षेत्र में ग्रामीण एवं कृषि उपभोक्ताओं को अब मात्र 5 रुपये में स्थायी कृषि पंप कनेक्शन उपलब्ध करा रही है। जब से यह योजना शुरू हुई है तब से अब तक इस योजना का लाभ 77 हजार 224 ग्रामीण कृषकों को मिल चुका है।