मकड़ाई एक्सप्रेस 24 गुजरात । प्रदेश के साबरकांठा जिले में प्रशासन ने एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जहाँ पिछले पांच वर्षों से खतरनाक रसायनों का उपयोग करके नकली दूध और छाछ बनाई जा रही थी। स्थानीय पुलिस और खाद्य विभाग की संयुक्त छापेमारी में ‘श्री सत्य डेयरी प्रोडक्ट्स’ नामक इकाई पर ताला लगा दिया गया है और ₹71 लाख मूल्य का माल जब्त किया गया है।
5 साल से चल रहा था स्वास्थ्य से खिलवाड़
जांच में सामने आया है कि यह फैक्ट्री पिछले आधे दशक से अवैध रूप से संचालित हो रही थी। अधिकारी तब हैरान रह गए जब उन्होंने देखा कि दूध को प्राकृतिक तरीके से नहीं, बल्कि कास्टिक सोडा, डिटर्जेंट पाउडर, पामोलिन तेल और यूरिया खाद जैसे घातक रसायनों के मिश्रण से तैयार किया जा रहा था।
300 लीटर असली दूध से बनता था 1,800 लीटर नकली दूध
पुलिस के अनुसार, आरोपी धोखाधड़ी का एक सोची-समझी योजना चला रहे थे। वे मात्र 300 लीटर असली दूध लेते थे और उसमें पानी, मिल्क पाउडर और विभिन्न केमिकल मिलाकर उसे 1,700 से 1,800 लीटर बना देते थे। इस ‘जहरीले’ मिश्रण को पाउच में पैक कर आसपास के ग्रामीण इलाकों में धड़ल्ले से बेचा जा रहा था।
जब्त सामग्री और गिरफ्तारी
छापेमारी के दौरान प्रशासन ने भारी मात्रा में मिलावटी सामान बरामद किया है, जिसमें शामिल हैं।मिल्क पाउडर1,300 किलो से अधिक यूरिया खाद, कास्टिक सोडा और डिटर्जेंट पाउडर,खाद्य तेल, रिफाइंड सोयाबीन और पामोलिन तेल (मलाई और गाढ़ापन दिखाने के लिए)। पुलिस ने तैयार उत्पाद करीब 1,962 लीटर मिलावटी दूध और 1,180 लीटर छाछ जब्त किया। इस मामले में पुलिस ने एक नाबालिग सहित पांच व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है।
क्यों मिलाए जा रहे थे ये खतरनाक पदार्थ…?
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इन रसायनों का उपयोग ग्राहकों को धोखा देने के लिए किया जाता था। दूध में डिटर्जेंट मिलाते जिससे झाग पैदा हो इसके साथ यूरिया और कास्टिक सोडा मिलाते दूध में फैट और प्रोटीन की मात्रा को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए।दूध को गाढ़ा और मलाईदार दिखाने के लिए पामोलिन आइल मिलाते थे।
प्रशासन की सख्त कार्रवाई
लोकल क्राइम ब्रांच (LCB), फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) और फूड एंड ड्रग्स विभाग की संयुक्त टीम ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। फैक्ट्री को सील कर दिया गया है और बरामद नमूनों को आगे की जांच के लिए भेजा गया है। प्रशासन अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि यह नेटवर्क और कहाँ-कहाँ फैला हुआ था।

