पटना। बिहार की राजनीति के लिए 14 अप्रैल 2026 का दिन राजनैतिक बदलाव का गवाह बना। करीब दो दशकों तक बिहार की सत्ता के केंद्र रहे नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। नीतिश के इस्तीफे के बाद बिहार में भगवा दल के लिए सीएम बनने का रास्ता साफ हो गया। इसके बाद बीजेपी ने मुरेठाधारी सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार बनने का ऐलान कर दिया। इस नई सरकार का शपथ ग्रहण 15 अप्रैल को होने वाला है। राजनीति के जानकारों के अनुसार भाजपा के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि बिहार में लंबे समय बाद वह मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज होगी। बता दें कि कभी राजद और जदयू के सिपाही रहे सम्राट आज भाजपा के उस ‘किंग’ की भूमिका में नजर आएंगे, जिन्होंने नीतीश के साथ सत्ता की साझेदारी में अपनी एक अलग और मजबूत पहचान बिहारवासियों के सामने बनाई।
दरअसल सम्राट चौधरी को राजनीति विरासत में मिली है। उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार के कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे। सम्राट ने 1990 में सक्रिय राजनीति में कदम रखकर महज 31 साल की उम्र में 1999 में कृषि मंत्री बनकर अपनी धमक दिखा दी। परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से उनकी जीत ने उन्हें राज्य की राजनीति में स्थापित किया। सम्राट का बीजेपी में शामिल होना उनके करियर का ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हुआ। वर्ष 2018 में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें बिहार प्रदेश का उपाध्यक्ष नियुक्त किया। उन्होंने विधान परिषद में भी विरोधी दल के नेता की भूमिका निभाई। 2023 के मार्च महीने में वे भाजपा के बिहार प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए, जो इसका साफ संकेत था कि आलाकमान उन पर बड़ा दांव खेलने जा रहा है। फिर जनवरी 2024 में उन्हें बिहार का उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) बनाया गया। इसके बाद दुबारा 20 नवंबर 2025 को उन्होंने फिर से डिप्टी सीएम पद दिया गया।
मुरैठा (पगड़ी) की प्रतिज्ञा
बता दें कि भाजपा में आने के बाद शुरुआती दौर में सम्राट नीतीश के विरोधी नेता के तौर पर उभरे और उन्होंने संकल्प लिया था कि जब तक नीतीश को सत्ता से बाहर नहीं करते, वे अपनी पगड़ी नहीं खोलने वाले है। हालांकि, बदलते समीकरणों के साथ वे आज नीतीश सरकार में ही डिप्टी सीएम की भूमिका में रहे।
बता दें कि सम्राट लव-कुश (कुर्मी-कोइरी) समीकरण के ‘कुश’ समुदाय से आते हैं। भाजपा उनके जरिए बिहार के एक बड़े पिछड़ा वर्ग वोट बैंक को अपने पाले में करने की कोशिश कर रही है। वे विपक्ष और सहयोगियों, दोनों के सामने अपनी बात बेबाकी से रखने के लिए जाने जाते हैं। बता दें कि पहली बार जनवरी 2024 और फिर 20 नवंबर 2025 को फिर डिप्टी सीएम बने थे। भाजपा की राजनीति की दृष्टि के मुताबिक भाजपा के भीतर और बिहार सरकार में उनका कद लगातार बढ़ता रहा है। आज जब बिहार की ब्यूरोक्रेसी में बड़े बदलाव की चर्चा है, सम्राट चौधरी की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

