इंदौर। बीमा पॉलिसी में फंसी रकम दिलाने का झांसा देकर ठगों ने एक रिटायर्ड शासकीय कर्मचारी से 6.21 लाख रुपये ठग लिए। पुलिस को शक है कि बीमा कंपनी से जुड़े किसी व्यक्ति ने ग्राहकों का डेटा लीक किया होगा।
कैसे दिया ठगी को अंजाम
सांवेर के रहने वाले एक रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी की बीमा पॉलिसी साल 2021 से बंद पड़ी थी। कुछ महीने पहले उनके पास एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को बीमा कंपनी का कर्मचारी बताया और कहा कि उनकी 2021 में बंद हुई पॉलिसी में लाखों रुपये जमा हैं।
ठग ने कहा कि अगर जल्दी प्रक्रिया पूरी कर ली जाए तो उन्हें पूरी रकम मिल सकती है। इसके लिए आरोपी ने प्रोसेसिंग फीस, एनओसी, टैक्स और दस्तावेज सत्यापन के नाम पर अलग-अलग किस्तों में रुपये मांगे।
आरोपियों ने जनवरी 2026 से जुलाई 2026 तक अलग-अलग खातों में कुल 6,21,461 रुपये ऑनलाइन जमा करवा लिए। जब काफी समय बाद भी भुगतान नहीं मिला तो पीड़ित को संदेह हुआ। परिवार से चर्चा के बाद उन्हें ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई।
ठगों को कैसे पता चली बंद पॉलिसी की जानकारी
पुलिस जांच में सामने आया कि पीड़ित की तीन कंपनियों की पॉलिसियां थीं। इनमें से एक अभी भी चल रही है जबकि दो बंद हो चुकी हैं।
पुलिस का कहना है कि पॉलिसी पूरी जानकारी होने के बाद ही ठगों ने संपर्क किया। ऐसे में शक है कि बीमा कंपनी या उससे जुड़े किसी व्यक्ति ने ग्राहकों का डेटा लीक किया है। इसी आधार पर ठग उन लोगों को निशाना बना रहे हैं जिनकी पॉलिसियां बंद हो चुकी हैं।
पुलिस की अपील
साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि बीमा, बैंक या किसी भी सरकारी योजना के नाम पर कॉल या मैसेज आने पर तुरंत पैसा ट्रांसफर न करें। किसी भी जानकारी के लिए सीधे कंपनी के ऑफिशियल नंबर या ब्रांच से संपर्क करें।

