इंदौर। बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (बीआरटीएस) हटाने को लेकर अधिकारियों की बहानेबाजी पर हाई कोर्ट ने नाराजगी जताई है। कोर्ट ने यहां तक कह दिया कि आदेशों को हल्के में लिया जा रहा है। हमें सख्त कार्रवाई के लिए मजबूर मत करिए। अब इस मामले में कोर्ट सतत निगरानी करेगा।
दरअसल, सोमवार को सुनवाई के दौरान अधिकारी कोर्ट को यह बताने का प्रयास कर रहे थे कि बीआरटीएस हटाने के बाद बनाए जाने वाले डिवाइडर के स्थान पर एलिवेटेड ब्रिज बनाया जाना है।
यह काम पीडब्ल्यूडी को करना है। इस पर याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि जिस ब्रिज के नाम पर डिवाइडर का काम अटकाया जा रहा है, उसका काम सिर्फ कागज में चल रहा है। सरकार इसे बनाने को लेकर गंभीर नहीं है।
सोमवार को हुई सुनवाई में कलेक्टर शिवम वर्मा, निगमायुक्त क्षितिज सिंघल और डीसीपी ट्रैफिक आनंद कलादगी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए।
कोर्ट ने अगली सुनवाई में पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर, एक्जीक्यूटिव इंजीनियर और बीआरटीएस हटाने का ठेका लेने वाले दिनेश यादव को भी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए कहा है। अगली सुनवाई 19 जनवरी को होगी।
ठेकेदार भाग गया है, हम नोटिस देकर कार्रवाई करेंगे
सुनवाई के दौरान निगम की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि जिस ठेकेदार को बीआरटीएस हटाने का ठेका दिया था, वह काम अधूरा छोड़कर भाग गया है। उसने एक साइड की रेलिंग हटा दी थी। उसे बस स्टॉप भी हटाना थे। अब निगम ठेकेदार को नोटिस देकर ठेका निरस्त करेगा। इसके बाद नया टेंडर जारी करेंगे। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और ठेकेदार को अगली सुनवाई पर उपस्थित होने के लिए आदेश दिया।

