“ये पार्ट-साइज़ का नहीं, दान-भावना के प्राइज का मैटर है, नादान लड़की !” आईने में अपने संस्कार का आकार देखें !
“ये पार्ट-साइज़ का नहीं, दान-भावना के प्राइज का मैटर है, नादान लड़की !” आईने में अपने संस्कार का आकार देखें !
मालूम हो, हरदा जिले में देहदान करने वाले पुरुष/महिला को अंतिम यात्रा के दौरान जिला प्रशासन द्वारा राजकीय सम्मान ‘गॉर्ड ऑफ़ ऑनर’ दिया जाता है। कपाल क्रिया, अस्थि विसर्जन आदि रस्म से दूर देहदाता मेडिकल स्टूडेंट की पढ़ाई के लिए देह को दान करने का संकल्प लेकर अपने मोक्ष की कामना करता है। प्रशिक्षु चिकित्सक को उक्त देह की चीर फाड़ कर रक्तसंचार, नस-नाड़ियों पेशियों व अन्य आवश्यक अंग की कार्य प्रणाली का सूक्ष्म अध्ययन करने शोध करने का अवसर मिलता है।
मुम्बई के किसी कॉमेडियन शो में एक मेडिकल की पढ़ाई कर चिकित्सक बनीं किसी लड़की द्वारा कॉमेडी शो में प्रशिक्षण के दौरान किये शल्य कार्य व सार्वजनिक रूप से मृत शरीर के अंग के साइज़ को लेकर की गई टिप्पणी और उससे उपजा हास्य अप्राकृतिक व दुर्भाग्यपूर्ण है।
ये देहदाता और उपलब्ध देह का घोर अपमान है, ये कृत्य अक्षम्य है। ऐसे शो होस्ट, टिप्पणीकर्ता व इसमें शामिल सभी व्यक्ति कड़ी निंदा के पात्र हैं। ऐसे अनुचित कृत्य कर्ताओं पर उचित कार्रवाई होना आवश्यक है।
हालांकि उक्त चिकित्सिका द्वारा माफीनामा भी दिया गया है। लेकिन ऐसे मामलों में कार्रवाई न होने से मेडिकल बोर्ड के हास्य का पात्र बनने का ख़तरा भी है। चिकित्सक की ऐसी हास्यास्पद टिप्पणी से भक्त द्वारा चिकित्सक को मिला भगवान का दर्ज़ा घटता है। और ऐसी टिप्पणी से देहदानदाता की संवेदनाएं जीवित रहते पीड़ित होती हैं।
ऐसे कृत्य में दोषियों के परिवारों के सदस्यों से देहदान संकल्प पत्र पूर्ति कर उनको देहदान के महान उद्देश्य से परिचित करवाना चाहिए । जिससे कि नई पीढ़ी इस बात पर गौरवान्वित हो सके ।
अंत में, साभार ली गई पंक्तियां –
नई पीढ़ी को डिसेक्शन हॉल के बाहर लिखा वो वाक्य पढ़ना पढ़ाना चाहिए:
_Hic Locus Est Ubi Mors Gaudet Succurrere Vitae_ – *यह वह जगह है जहाँ मृत्यु, जीवन की मदद करने में आनंदित होती है।*
⏩मुकेश पाण्डेय
प्रदेश संवाददाता मकडाई एक्सप्रेस

