भोपाल। एमपी पुलिस ने अब 5 लाख रुपये से अधिक की चोरी की घटनाओ को भी गंभीर अपराधों की श्रेणी में शामिल कर लिया है। इस संबंध में पुलिस मुख्यालय के अपराध अनुसंधान शाखा (सीआईडी) ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करते हुए सभी पुलिस जोन के पुलिस महानिरीक्षक, सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक के साथ ही एडीजी सायबर, एसटीएफ, नारकोटिक्स को तत्काल प्रभाव से अमल करने को कहा गया है। जारी आदेश के अनुसार, 5 लाख या उससे अधिक कीमत की चोरी के मामलों को अब गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा जायेगा। अब तक ऐसी चोरी के अधिकतर मामलों में थाना टीआई या उप निरीक्षक स्तर के अधिकारी जांच करते थे, लेकिन नई व्यवस्था के तहत अब ऐसे प्रकरणो की जांच अनुविभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीओपी-सीएसपी) रैंक के अफसर की मॉनिटरिंग में होना अनिवार्य कर दिया गया है। पुलिस मुख्यालय ने पूर्व में भी गंभीर अपराधों को लेकर वरिष्ठ अफसरों को दिशा निर्देश जारी किए थे। जिसमें बताया गया है कि पुलिस को घटना से संबंधित घटनास्थल पर जाना होगा। अपराध से संबंधित तथ्यों और परिस्थितियों का पता लगाना होगा। अपराध करने के पर्याप्त साक्ष्य होने के बाद आरोपी की तलाश और गिरफ्तारी करना होगी। साक्ष्यों का एकत्रीकरण जिसमें विभिन्न व्यक्तियों की जांच स्थानों की तलाशी एवं आवश्यक वस्तुओं को जब्त करना होगा। इन सब की मॉनिटरिंग जिम्मेदार अफसरों को करना होगी।
पहले सिर्फ नकबजनी को ही माना था गंभीर अपराध
इससे पहले पुलिस मुख्यालय ने अपने दिशा निर्देश में 5 लाख से अधिक की नकबजनी को ही गंभीर अपराध माना था। किसी घर में घुस कर चोरी की वारदात को अंजाम देना नकबजनी की श्रेणी में आता है। इस तरह की वारदात में पांच लाख से ज्यादा का माल होने पर उसे गंभीर अपराध माना गया था, जिसकी मॉनिटरिंग भी डीएसपी रैंक के अफसर को करने के निर्देश दिए गए थे। अब इसके साथ चोरी को जोड़ा गया है। अब इस तरफ के किसी भी मामले में चोरी का माला पांच लाख रुपए से अधिक का होगा तो एक ही रैंक के अफसर को मॉनिटरिंग करने के लिए पुलिस मुख्यालय की सीआईडी शाखा ने पाबंद किया है। गौरतलब है कि गंभीर अपराधों की श्रेणी में हत्या, बलात्कार, डकैती, आतंकवाद, मानव तस्करी और बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी जैसे अपराध शामिल हैं, इनके लिए कड़ी सज़ा का प्रावधान है।

