मकडा़ई एक्सप्रेस 24 भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पुराने कचरे (लिगेसी वेस्ट) के निपटान को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। वर्षों से भानपुर खंती में जमा कचरे को हटाने का दावा किया जा रहा था, लेकिन अब यह सामने आया है कि लगभग 6 लाख टन कचरे को भानपुर से हटाकर आदमपुर क्षेत्र में डंप किया गया है। इससे यह बहस तेज हो गई है कि क्या वास्तव में कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण हो रहा है या केवल उसका स्थान बदला गया है।
क्या है ‘लिगेसी वेस्ट’ ?
लिगेसी वेस्ट वह पुराना ठोस कचरा होता है जो वर्षों तक डंपिंग ग्राउंड में बिना वैज्ञानिक प्रक्रिया के जमा रहता है। समय के साथ यह कचरा सड़ता-गलता है और जमीन व भूजल को प्रदूषित करने का खतरा पैदा करता है। भानपुर खंती में पिछले कई वर्षों से लाखों टन कचरा जमा था, जिसे हटाने के लिए नगर निगम ने विशेष अभियान चलाने का दावा किया था।
भानपुर से आदमपुर तक कैसे पहुंचा कचरा ?
नगर निगम ने भानपुर में जमा कचरे को हटाने के लिए मशीनों के जरिए खुदाई और छंटाई का काम शुरू किया। अधिकारियों के अनुसार, कचरे की प्रोसेसिंग की जा रही है। लेकिन स्थानीय स्रोतों का कहना है कि बड़ी मात्रा में कचरे को ट्रकों के जरिए आदमपुर क्षेत्र में ले जाकर डंप किया गया है।
बताया जा रहा है कि करीब 6 लाख टन कचरा नए स्थान पर इकट्ठा हो चुका है, जिससे वहां कचरे का पहाड़ जैसा ढेर बन गया है।
स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ी
आदमपुर क्षेत्र के रहवासियों ने आशंका जताई है कि, दुर्गंध और वायु प्रदूषण बढ़ सकता है।बारिश के दौरान गंदा पानी आसपास के खेतों और जल स्रोतों में जा सकता है।मच्छरों और बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।लोगों का कहना है कि अगर कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान नहीं हुआ तो क्षेत्र में स्वास्थ्य संकट खड़ा हो सकता है।
क्या कहता है नगर निगम
नगर निगम का दावा है कि, कचरे की बायो-रिमेडिएशन और बायो-माइनिंग प्रक्रिया जारी है।उपयोगी सामग्री को अलग कर रीसायकल किया जा रहा है।शेष कचरे का सुरक्षित निस्तारण किया जाएगा।अधिकारियों के मुताबिक, यह कदम अस्थायी व्यवस्था का हिस्सा है और अंतिम लक्ष्य शहर को पुराने कचरे से मुक्त करना है।
पर्यावरण विशेषज्ञ क्या कहते हैं ?
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कचरे को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना समाधान नहीं है।
वैज्ञानिक छंटाई
हानिकारक तत्वों का सुरक्षित निपटान
लीचेट (कचरे से निकलने वाला तरल) नियंत्रण
सही तरीके से निष्पादन नहीं किया गया, तो प्रदूषण का खतरा बना रहेगा।
यक्ष प्रश्न अब आगे क्या ?
अब सवाल यह है कि क्या आदमपुर में जमा कचरे का समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से निपटान होगा, या यह स्थान भी स्थायी डंपिंग ग्राउंड में बदल जाएगा। शहरवासियों को उम्मीद है कि प्रशासन स्पष्ट योजना और समयसीमा सार्वजनिक करेगा, ताकि पर्यावरण और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को रोका जा सके।
क्या बनेगा कचरा मुक्त शहर
भोपाल में कचरा प्रबंधन की यह स्थिति प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को उजागर करती है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या शहर सच में ‘लिगेसी वेस्ट फ्री’ बन पाता है या नहीं।

