उज्जैन: शिप्रा आरती को लेकर पंडा समिति और प्रशासन आमने-सामने, पंडा समिति ने किया जल सत्याग्रह का ऐलान रामघाट पर आरती की जिम्मेदारी को लेकर टकराव
मकडा़ई एक्सप्रेस 24 उज्जैन ।शहर के प्रसिद्ध रामघाट पर शिप्रा आरती के आयोजन को लेकर पंडा समिति और जिला प्रशासन के बीच विवाद बढ़ गया है। 5 अगस्त से चला आ रहा गतिरोध अभी तक सुलझ नहीं पाया है। इस बीच पंडा समिति ने शनिवार शाम 4 बजे शिप्रा नदी में जल सत्याग्रह करने का निर्णय लिया है।
विवाद की जड़ – आयोजन की जिम्मेदारी
विवाद का मुख्य कारण आरती कराने का अधिकार है। प्रशासन का कहना है कि आगामी सिंहस्थ को देखते हुए हरिद्वार और काशी की तर्ज पर शिप्रा आरती को भव्य रूप दिया जाएगा। वहीं पंडा समिति का तर्क है कि वे पिछले करीब 11 वर्षों से रामघाट पर नियमित रूप से आरती कराते आ रहे हैं। नई व्यवस्था को वे अपने पारंपरिक अधिकारों में हस्तक्षेप मान रहे हैं।
5 अगस्त को बटुकों को रोका गया
पंडा समिति के अनुसार रामघाट पर 2015 से हर शाम करीब 6:30 बजे शिप्रा आरती होती आ रही है। 5 अगस्त को महाकाल मंदिर समिति ने सुरक्षा व्यवस्था की मांग करते हुए महाकाल थाने और प्रशासन को पत्र लिखा। शाम 5 बजे जब महाकाल मंदिर के बटुक और कर्मचारी रामघाट पहुंचे तो पंडा समिति के लोगों ने उन्हें आरती करने से रोक दिया। इसके बाद दोनों पक्षों में तनाव की स्थिति बन गई। बाद में मंदिर समिति के बटुकों ने रामघाट पर अलग स्थान पर आरती की।
7 अगस्त को पुलिस के सामने फिर हुआ टकराव
7 अगस्त को भी पंडा समिति ने महाकाल मंदिर समिति के बटुकों को रामघाट पर आरती करने से रोकने की कोशिश की। मौके पर पुलिस बल के साथ दो एसडीएम पहुंचे और दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया। गतिरोध न सुलझने पर पुलिस ने पंडा समिति के पुजारियों को हटाकर मंदिर समिति के बटुकों से दूसरे स्थान पर आरती करवाई। इसी कार्रवाई के विरोध में पंडा समिति ने जल सत्याग्रह का ऐलान किया।
प्रशासन का पक्ष – सिंहस्थ के लिए भव्य आरती
एसडीएम पवन बारिया ने कहा कि सिंहस्थ में आने वाले श्रद्धालुओं को हरिद्वार जैसी भव्य आरती का अनुभव मिले, इसलिए नई शुरुआत की जा रही है। उनके अनुसार महाकाल प्रबंध समिति ने शिप्रा तट पर आरती शुरू करने का फैसला लिया है। इसमें किसी को रोकने या हटाने का इरादा नहीं है।
पंडा समिति का दावा – 11 साल से हम कर रहे आरती
पंडा समिति के राजेश त्रिवेदी ने कहा कि तीर्थ पुरोहित 2015 से लगातार शिप्रा आरती करा रहे हैं और समय के साथ इसका स्वरूप भी भव्य किया गया है। समिति का आरोप है कि 11 साल बाद अचानक जिम्मेदारी महाकाल मंदिर समिति को देना पुरोहितों को बाहर करने जैसा है। समिति ने साफ किया है कि वह परंपरा के अनुसार आरती कराती रहेगी और मंदिर समिति को अलग से आरती की अनुमति नहीं देगी।
आरती का प्रस्ताव ठुकराया
एसडीएम एलएन गर्ग ने बताया कि प्रशासन ने दोनों पक्षों को मिलकर आरती करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन पंडा समिति के पुरोहित राजी नहीं हुए। अब प्रशासन के अनुसार रोजाना शिप्रा आरती महाकाल मंदिर समिति द्वारा कराई जाएगी। शनिवार शाम को भी रामघाट पर आरती होगी।
स्मार्ट सिटी ने भी जारी किया टेंडर
शिप्रा आरती को सांस्कृतिक आयोजन के रूप में विकसित करने के लिए उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने भी टेंडर निकाला है। टेंडर का नाम ‘उज्जैन में मां शिप्रा आरती का आयोजन’ है। योजना के तहत निजी एजेंसी को आरती के आयोजन, प्रबंधन, ब्रांडिंग और डिजिटल प्रचार की जिम्मेदारी दी जाएगी। स्मार्ट सिटी के सीईओ संदीप शिवा ने बताया कि चयनित एजेंसी यूनिटी मॉल के पीछे शिप्रा घाट पर पीपी मॉडल पर दैनिक और विशेष आरती कराएगी।
जल सत्याग्रह के ऐलान के बाद अब यह विवाद और गहरा सकता है। प्रशासन और पंडा समिति के बीच कोई समाधान निकलता है या नहीं, यह आने वाले दिनों में तय होगा।

