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हरदा में स्मार्ट मीटर लगाए जाने का विरोध प्रदर्शन

लोगो ने कहा बिना सहमति के लगा रहे स्मार्ट मीटर

 मकडा़ई एक्सप्रेस 24 हरदा । जिले में स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया को लेकर उपभोक्ताओं और बिजली विभाग के बीच विवाद बढ़ गया है। उपभोक्ताओं ने बिना सूचना और सहमति के पुराने मीटर हटाकर स्मार्ट मीटर लगाए जाने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। विरोध इतना बढ़ा कि मौके पर पहुंचे विधायक के सामने डीजीएम की गाड़ी को रोक दिया गया।

उपभोक्ताओं की मुख्य शिकायतें:

1. सहमति के बिना इंस्टॉलेशन : लोगों का कहना है कि बिजली विभाग ने बिना पूर्व सूचना और उपभोक्ता की मंजूरी के मीटर बदले।

2.  बिल में बढ़ोतरी : कई उपभोक्ताओं ने दावा किया कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिल अचानक बढ़ गया है।

3. रीडिंग और रिचार्ज में दिक्कत : प्रीपेड मोड में रिचार्ज, बैलेंस अलर्ट और मोबाइल ऐप को लेकर उपभोक्ता परेशान हैं।

प्रशासन का एक्शन

कलेक्टर ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि सीएम हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों को नजरअंदाज करने वाले अधिकारियों का वेतन काटा जाएगा। इसके साथ ही आवारा कुत्तों को हटाने और अवैध निर्माण तोड़ने के निर्देश भी दिए गए।

स्मार्ट मीटर को लेकर सरकार की गाइडलाइन/आदेश – क्या कहता है कानून…..?

उपभोक्ताओं के विरोध के बीच सरकार के आदेश और गाइडलाइन जानना जरूरी है:

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स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं, विकल्प है – केंद्र सरकार का स्पष्टीकरण

केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने लोकसभा में लिखित जवाब में साफ किया है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर अनिवार्य नहीं हैं। ये उपभोक्ता की मर्जी पर आधारित हैं। बिजली अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत उपभोक्ता खुद प्रीपेड मीटर मांग सकता है, लेकिन मौजूदा उपभोक्ताओं के लिए इसे जबरन लगाना अनिवार्य नहीं है।

CEA ने “प्रीपेड अनिवार्य” वाला नियम हटाया

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण CEA ने 1 अप्रैल 2026 को जारी संशोधन में 2022 वाला नियम हटा दिया है। पहले नियम था कि संचार नेटवर्क वाले इलाकों में सभी उपभोक्ताओं को प्रीपेड मोड वाले स्मार्ट मीटर से ही बिजली दी जाएगी। अब नए नियम में सिर्फ “स्मार्ट मीटर” लिखा है, “प्रीपेड मोड” शब्द हटा दिया गया है। यानी *प्रीपेड या पोस्टपेड चुनने का अधिकार अब उपभोक्ता के पास है*।

RDSS योजना के तहत इंस्टॉलेशन – मुफ्त मे

केंद्र सरकार की पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना RDSS के तहत 20.33 करोड़ स्मार्ट मीटर स्वीकृत हैं। सरकार का कहना है कि मौजूदा उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर इंस्टॉलेशन *बिना किसी अग्रिम लागत के* किया जाएगा। खर्च डिस्कॉम और AMISP कंपनी उठाएगी, जो बाद में टैरिफ के जरिए वसूला जा सकता है।

उपभोक्ता जागरूकता अनिवार्य

आरडीएसएस के मानक बोली दस्तावेज में साइबर सुरक्षा और उपभोक्ता सहभागिता के प्रावधान हैं। डिस्कॉम को पर्चे, बैनर, लाउडस्पीकर अनाउंसमेंट और कार्यशाला के जरिए उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर के फायदे और मोबाइल ऐप चलाना सिखाना जरूरी है।

सरकार का तर्क

सरकार का कहना है कि स्मार्ट मीटर से रियल-टाइम डेटा मिलेगा, बिलिंग में गड़बड़ी खत्म होगी, अनुमानित रीडिंग बंद होगी और बिजली चोरी रुकेगी। उपभोक्ता मोबाइल ऐप से खपत देखकर बजट बना सकते हैं। कानून के अनुसार स्मार्ट मीटर लगाना गलत नहीं, लेकिन *बिना सूचना, बिना सहमति और जबरन प्रीपेड मोड थोपना नियम के खिलाफ* है।