सीरूपुरा में भीषण पेयजल संकट, 300 की आबादी एक किलोमीटर दूर से ला रही पानी,बंद हैंडपंप और फेल नल-जल योजना ने बढ़ाई मुश्किल !
300 लोगों की आबादी प्यास से जूझ
रही।
(केके यदुवंशी)
मकड़ाई एक्सप्रेस 24 सिवनी मालवा। ग्राम लोखरतलाई के आदिवासी बहुल टोला सीरूपुरा में पेयजल संकट ने जनजीवन प्रभावित कर दिया है। लगभग 300 की आबादी वाले इस टोले में पानी के सभी स्रोत सूख चुके हैं। आदिवासी महिलाएं और बच्चे रोजाना एक किलोमीटर दूर किसान के खेत में लगे नलकूप से पानी लाने को मजबूर हैं।
दो साल से बंद पड़े हैंडपंप
गांव के स्कूल सहित तीन हैंडपंप पिछले दो साल से खराब हैं। ग्रामीणों के अनुसार पीएचई विभाग को कई बार शिकायत देने के बावजूद अब तक मरम्मत नहीं हुई है। इससे संकट और गहरा गया है।
नल-जल योजना भी ठप
सरकार की नल-जल योजना के तहत गांव में बिछाई गई पाइपलाइन पिछले चार महीनों से बंद है। पानी का स्रोत सूखने के कारण सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई है। ग्रामीणों की योजना से जुड़ी उम्मीदें भी टूट गई हैं।
बिजली पर टिकी है रसोई
पानी का एकमात्र सहारा खेतों में लगे निजी नलकूप हैं, जो बिजली आने पर ही चलते हैं। गांव में बिजली की व्यवस्था भी अनियमित है। एक सप्ताह दिन में बिजली मिलती है तो दूसरे सप्ताह रात में। बिजली न होने पर कई घरों में खाना तक नहीं बन पाता।
आदिवासी महिलाओं की परेशानी को देखते हुए पास के खेत मालिक सरवन कहार ने अपने नलकूप से पीने का पानी उपलब्ध कराया है। इससे कुछ राहत मिली है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
सरपंच प्रतिनिधि रवि गुप्ता ने बताया कि समस्या को लेकर पीएचई विभाग, स्थानीय विधायक और एसडीएम को कई बार अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ग्रामीणों ने बंद हैंडपंपों की मरम्मत, नल-जल योजना के स्रोत को पुनर्जीवित करने और वैकल्पिक जल व्यवस्था की तत्काल मांग की है।
विभाग ने दिया आश्वासन
पीएचई विभाग के प्रभारी एसडीओ उमेश कोबले ने कहा कि नल-जल योजना के तहत खोदे गए बोर का परीक्षण किया जाएगा। संभव हुआ तो बंद पड़े हैंडपंप भी चालू कर दिए जाएंगे।

