हरसूद। विगत दिनों 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार के अंतर्गत जल संरक्षण के क्षेत्र में खंडवा जिले में एक नया कीर्तिमान स्थापित कर देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, लेकिन नगर परिषद् छनेरा-हरसूद के लापरवाह सिस्टम की अनदेखी से नगर में पानी को सहेजने और अपव्यय को रोकने को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए जाने से रोजाना लाखों गैलन पानी की बर्बादी से जिला प्रशासन ने तमाम प्रयासों पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
हालात यह है कि नगर के फिल्टर प्लांट जहां से पूरे शहर में जल प्रदाय होता है, वहीं नपं कार्यालय मात्र 300 मीटर दूर है। रोजाना सुबह 4 बजे से 12 बजे तक मेन लाइन के सप्लाई चेंबर और पाइप लाइन लीकेज से हजारों लीटर पानी बहता है। इसके अलावा पुनर्वास स्थल नया हरसूद के सेक्टर 8 स्थित ओवरहेड टैंक से एक दिन के अंतराल में मध्य रात्रि 3 से बजे सुबह 8 बजे तक इस कदर पानी की बर्बादी होती है। यहां पानी की टंकी के ओवरफ्लो होने पर बहाव नाले का स्वरूप धारण कर लेता है। ऐसे में अब देखना है कि नपं जिम्मेदार अधिकारी, जनप्रतिनिधि और जलप्रदाय शाखा के कर्मचारियों द्वारा इस तरह रोजाना पानी की बर्बादी को रोकने के लिए कोई कदम उठाए जाते हैं या नहीं?
दर्जनभर चेंबर वॉल और पाइप लाइन से लीकेज-शहर में एमपीयूडीसी द्वारा वृहद जलप्रदाय योजना का कार्य अंतिम चरणों में है। ऐसा दावा ठेकेदार कंपनी द्वारा किया जा रहा है, लेकिन प्रमुख ओवरहेड टैंकों से रोजाना 3 से 4 लाख लीटर पानी व्यर्थ बह जाने से योजना की गुणवत्ता स्पष्ट हो रही है। यहां बता दें कि नगर में एक दर्जन से ज्यादा सप्लाई चेंबर वॉल और 35 से अधिक स्थानों पर पाइप लाइन भी लीकेज है। इस कारण सड़क जलमग्न हो रही है।

