जीवन सिर्फ सुविधाएँ इकट्ठा करने का नाम नहीं है। सुविधाएँ तो साधन हैं, साध्य तो श्रेष्ठ मनुष्य बनना है।
गीता कहती है – “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।” अर्थात हमारा अधिकार सिर्फ कर्म पर है, फल पर नहीं। इसलिए फल की चिंता में रुकना नहीं, कर्म में लग जाना ही बुद्धिमानी है।
आज का युवा सबसे ज्यादा अपनी ऊर्जा तीन जगह खो रहा है – निराशा में, आलस्य में और फालतू की चिंता में। समय किसी के लिए नहीं रुकता। जो समय का सम्मान करता है, समय उसे सम्मानित करता है।
आज का संकल्प छोटा रखिए पर पक्का रखिए –
आज कुछ नया सीखना है, आज अपने लक्ष्य के लिए पसीना बहाना है, आज किसी एक व्यक्ति के काम आना है, और आज 10 मिनट अपने मन को शांत रखना है।
रात को सोने से पहले खुद से एक ही सवाल पूछिए – “आज मैंने कल से बेहतर बनने के लिए क्या किया…?”
याद रखिए, जवानी शरीर की ताकत नहीं, सही दिशा में लगा विचार और अनुशासन ही असली शक्ति है। आलस्य छोड़िए, उत्साह से उठिए। आपका हर दिन आपके परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए उपयोगी होना चाहिए।

