ज़िंदगी कभी भी सीधी रेखा नहीं होती। उसमें धूप भी है और छाँव भी, सुख भी है और दुःख भी। लेकिन मनुष्य की असली पहचान तब नहीं होती जब सब कुछ अच्छा चल रहा हो, असली पहचान तब होती है जब चारों तरफ अंधेरा हो, तेज़ हवाएं चल रही हों और तूफान दरवाजा खटखटा रहा हो।
तूफानों में डटकर खडे़ रहे
तूफानों में ही चिरागों की परख होती है। जो दिया हल्की हवा में बुझ जाए, उसका कोई मूल्य नहीं। मूल्य तो उस दीये का है जो आंधी में भी अपनी लौ को बचाए रखे, लड़े, डट कर खड़ा रहे। ठीक वैसे ही जो व्यक्ति सामान्य परिस्थितियों में तो सफल दिखता है पर विपरीत परिस्थिति आते ही टूट कर बिखर जाता है, वह कभी महान नहीं बन सकता।
जो जितना तपेगा उतना निखरेगा
विपरीत परिस्थितियां हमें तोड़ने के लिए नहीं, हमें गढ़ने के लिए आती हैं। सोने को भी चमकने के लिए आग में तपना पड़ता है। हीरे को भी तराशे जाने की पीड़ा सहनी पड़ती है। यदि आप आज कठिन दौर से गुजर रहे हैं, तो समझ लीजिए प्रकृति आपको तराश रही है।
याद रखिए, इतिहास उन लोगों ने नहीं बनाया जो भाग गए, इतिहास उन लोगों ने बनाया जो टिके रहे। रुक जाना आसान है, हार मान लेना आसान है, लेकिन मुश्किलों के बीच भी अपने विश्वास का दिया जलाए रखना ही सच्ची जीत है।
अपने ताकत को पहचानों
इसलिए जब अगली बार तूफान आए, तो डरिए मत। अपने भीतर के चिराग को और मजबूती से पकड़ लीजिए। क्योंकि अंधेरा चाहे कितना भी गहरा हो, एक छोटा सा दिया भी उसे चीरने की ताकत रखता है। और जो विपरीत परिस्थितियों में टिके रहते हैं, वही अंत में सफलता की कहानी लिखते हैं।

