4 साल से दर्द में जी रहा आदिवासी किसान: आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद नहीं मिला समुचित इलाज, अब जांघ तक फैला संक्रमण
हरदा। हरदा जिले के ग्राम कुंभीखेड़ा निवासी आदिवासी किसान रामस्वरूप पिछले लगभग चार वर्षों से गंभीर बीमारी और आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद उनके पैर में आई गंभीर चोट का आज तक समुचित इलाज नहीं हो सका। अब संक्रमण पंजे से बढ़कर जांघ तक फैल चुका है, लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों के कारण वे आज भी खेतों में काम करने को मजबूर हैं।
जानकारी के अनुसार करीब चार वर्ष पहले सिराली क्षेत्र में मोटरसाइकिल फिसलने से रामस्वरूप के पैर में गंभीर चोट आई थी। प्रारंभिक उपचार हरदा के एक निजी अस्पताल में करीब 10 दिन तक चला, लेकिन स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उन्हें खंडवा और फिर इंदौर रेफर किया गया। परिजनों का कहना है कि निजी अस्पताल में प्रतिदिन 30 से 40 हजार रुपये खर्च का अनुमान बताया गया। बाद में सरकारी अस्पताल में भी अपेक्षित लाभ नहीं मिलने पर आर्थिक मजबूरी के चलते वे घर लौट आए और घरेलू दवाइयों व जड़ी-बूटियों से इलाज करने लगे।
समय पर समुचित उपचार नहीं मिलने के कारण पैर का संक्रमण लगातार बढ़ता गया और अब पंजे से लेकर जांघ तक फैल चुका है। पैरों में बड़े-बड़े घाव हो गए हैं और चलना भी मुश्किल हो गया है।
रामस्वरूप के परिवार की स्थिति भी बेहद दयनीय है। परिवार में लगभग 80 वर्षीय दादी, मां, पत्नी, 18, 19 और 20 वर्ष के तीन छोटे भाई, दो अविवाहित बहनें तथा चार छोटे-छोटे बच्चे हैं। पूरे परिवार की जिम्मेदारी रामस्वरूप के कंधों पर है। उनके पास केवल एक एकड़ कृषि भूमि है, जिससे ही पूरे परिवार का भरण-पोषण होता है।
परिजनों का आरोप है कि आयुष्मान भारत कार्ड होने के बावजूद उन्हें समय पर प्रभावी और समुचित इलाज नहीं मिल सका। आज भी रामस्वरूप लकड़ी के सहारे चलते हुए 20 लीटर की दवाई की टंकी पीठ पर उठाकर खेतों में स्प्रे करने को मजबूर हैं, ताकि परिवार का पेट पल सके।
यह मामला सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं और गरीबों के लिए चलाई जा रही योजनाओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और जनप्रतिनिधियों से रामस्वरूप का तत्काल बेहतर इलाज, आर्थिक सहायता और परिवार के पुनर्वास की व्यवस्था करने की मांग की है।

