ग्राम रोजगार सहायकों को पिछले 5 माह से नहीं मिला वेतन, आर्थिक तंगी से जूझ रहा परिवार, आंदोलन की चेतावनी दी।
लंबित वेतन भुगतान एवं आर्थिक कठिनाइयों के निराकरण एवं वेतन की मांग
हरदा। जिले की सभी पंचायत सहायक सचिव शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं जैसे- आवास, मनरेगा, पेंशन, आयुष्मान एवं अन्य समस्त प्रदत्त कार्यों को धरातल पर क्रियान्वित करने हेत दिन-रात समर्पित रहते इसके बावजूद, वर्तमान में जिन असहनीय परिस्थितियों का सामना पंचायत के रोजगार सहायकों को करना पड़ रहा है। बीते पांच महसे वेतन नहीं मिलने से सहायक सहायक सचिव परेशान है। आर्थिक तंगी से परिवार गुजर रहा है। आज बड़ी संख्या में खिड़कियां में ग्राम रोजगार सहायकों ने जनपद सीईओ को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में बताया कि।
-1.वेतन का अभाव और आर्थिक संकटः पिछले पाँच माह से वेतन का भुगतान न होने के कारण हम सभी का पारिवारिक बजट पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। वेतन का भुगतान न होने के कारण हम सभी के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की शिक्षा और दैनिक आवश्यकताओं की पति करना अब असंभव होता जा रहा है के दौर में इतनी कम राशि में सपरिवार जीवन निर्वाह करना अत्यंत कठिन है।
वेतन न मिलने से हमारे होम लोन, पर्सनल लोन EMI और बढ़ते कर्ज का बोझ वर्तमान में हमारा मासिक मानदेय मात्र 18,000 रुपये है। आज की कमर तोड़ महंगाई या अन्य बैंक किश्तें (EMI) बाउंस हो रही हैं। इससे हमें बैंक की पेनल्टी के साथ-साथ खराब सिबिल स्कोर की मार भी झेलनी पड़ रही है। स्वास्थ्य एवं शिक्षा पर प्रभावः -होने के कारण उनकी पढ़ाई बाधित हो रही है। गंभीर बीमारी की स्थिति में हमारे पास इलाज के लिए कोई पूजी शेष नहीं बची है। परिवार में बुजुर्गो की दवाइयों और बच्चों की स्कूल फीस का भुगतान समय पर न परिवार में बुजुर्गों की दवाइयों और अचानक आई बीमारियों के इलाज के लिए हमें दूसरों के आगे हाथ फैलाना पड़ रहा है। फील्ड खर्च की मारः पंचायत कार्यों हेतु लगातार ग्रामों का भ्रमण करना पड़ता है पड़ता है: जूसमें पेट्रोल का भारी खर्च आता है। वेतन के अभाव में अब वाहनों में पेट्रोल डलवाने और कार्यालयीन खर्च वहन करने की क्षमता समाप्त हो चुकी है। पंचायत के कार्यों के लिए हमें अपने निजी वाहन से फील्ड में जाना पड़ता है। वेतन के अभाव में अब वाहन में पेट्रोल डलवाने तक के पैसे शेष नहीं बचे हैं, जिससे शासकीय कार्यों का संपादन भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।
सामाजिक एवं मानसिक दबावः वर्तमान वैवाहिक एवं मांगलिक सीजन में सामाजिक उत्तरदायित्व निभाना भी हमारे लिए असंभव हो गया है। 18,000 रुपये न मिलना केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि एक परिवार का संकट है। मात्र 18,000 रुपये के अल्प वेतन और वह भी समय पर न मिलने से हम सभी कर्मचारी मानसिक अवसाद (Depression) की स्थिति में हैं।
प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
आगामी 3 दिवस के भीतर हमारे समस्त बकाया वेतन का एकमुश्त भुगतान सुनिश्चित किया जाए। बढ़ती महंगाई को खते हुए हमारे मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि हेतु शासन को प्रस्ताव भेजा जाए। अगर हज़ारों तीन दिवस में मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन करने हेतु बाध्य होना पड़ेगा जिसका जिम्मेदार प्रशासन होगा।

