(कैलाश सेजकर)
मकड़ाई एक्प्रेस 24 भोपाल।
मध्य प्रदेश में मार्च से ही भीषण गर्मी ने पानी के लिए हाहाकार मचा दिया है। कई जिलों में भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है और हैंडपंप-नलकूप जवाब दे रहे हैं। मार्च 2026 से ही लोग पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं। सरकारी नल-जल योजनाएं भी कई जगह ठप पड़ी हैं।
26 ब्लॉक ‘अतिदोहित’, मालवा-निमाड़ सबसे ज्यादा बेहाल
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के 313 ब्लॉक में से 26 ब्लॉक ‘अतिदोहित’ श्रेणी में पहुंच गए हैं। इनमें से 25 ब्लॉक मालवा-निमाड़ क्षेत्र के हैं। रतलाम के चार ब्लॉक में हालात सबसे गंभीर हैं।
इसके अलावा 6 ब्लॉक ‘क्रिटिकल’ और 64 ब्लॉक ‘सेमी-क्रिटिकल’ श्रेणी में हैं। इंदौर, उज्जैन और शाजापुर जिले क्रिटिकल में हैं जहां 80% से ज्यादा भूजल दोहन हो चुका है। भोपाल भी ‘सेमी-क्रिटिकल’ जोन में है, यहां सिर्फ 20.71% भूजल बचा है।
60% भूजल खत्म, 15 साल से हालात जस के तस
राज्यसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार मप्र ने अपने भूजल का 60% दोहन कर लिया है। चिंता की बात ये है कि केंद्रीय भूजल बोर्ड के अनुसार पिछले 15 साल से स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। बोरवेल की बेतहाशा खुदाई, बढ़ती आबादी और जल संचय की कमी इसके बड़े कारण हैं।
नल-जल योजना भी प्यास नहीं बुझा पा रही
सिवनी, लखनादौन, बरघाट समेत कई विकासखंडों में जल स्रोत सूखने से पेयजल योजनाएं बंद होने की कगार पर हैं। सतही जल पर आधारित जल निगम की योजना से अभी सिर्फ 50% गांव कवर हुए हैं।
सरकार का एक्शन: बोरिंग पर रोक, जिले ‘जल अभावग्रस्त’ घोषित
गिरते भूजल को देखते हुए सरकार ने भोपाल, नीमच, झाबुआ, इंदौर, खरगोन और रायसेन समेत कई जिलों में 1 अप्रैल से 31 जुलाई 2026 तक बोरवेल-हैंडपंप की खुदाई पर रोक लगा दी है। भोपाल जिले को ‘जल-अभाव क्षेत्र’ घोषित कर बोरवेल खनन पर रोक लगाई गई है। नियम तोड़ने पर 2 साल तक जेल और जुर्माना लगेगा।
कुछ राहत भी: 83% कुओं में बढ़ा जलस्तर
केंद्र की ‘डायनामिक ग्राउंड वाटर असेसमेंट रिपोर्ट 2025’ में राहत की खबर भी है। मप्र के 82.82% निगरानी वाले कुओं में जलस्तर बढ़ा है, जो राष्ट्रीय औसत 73.25% से बेहतर है। अटल भूजल योजना और 2901 अमृत सरोवर से 13,493 हेक्टेयर जमीन पर सिंचाई पद्धति सुधरी है। फिर भी 17% कुओं में गिरावट दर्ज की गई है।
अब आगे क्या सुनिए चेतावनी
विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर भूजल संरक्षण के ठोस प्रयास नहीं हुए तो आने वाले सालों में प्रदेश के कई हिस्से गंभीर जल संकट में फंस जाएंगे। मार्च अप्रैल 2026 में कई जिलों को फिर जल अभावग्रस्त घोषित करने की तैयारी है।

