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बिन पानी सब सून, हरदा जिले में भूजल और नल-जल योजना के हाल बेहाल

ग्रामीण पानी के लिए कर रहे मशक्कत

मकड़ाई एक्सप्रेस 24 हरदा। मार्च से शुरू हुई भीषण गर्मी के बीच हरदा जिले में भी पानी का संकट गहरा गया है। भूजल स्तर गिरने और नल-जल योजनाओं के ठप होने से ग्रामीण बूंद-बूंद को तरस रहे हैं।

भूजल स्तर 39.8 मीटर नीचे, जिला ‘जल अभावग्रस्त’ घोषित

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के मुताबिक हरदा में वर्तमान भूजल स्तर 39.8 मीटर पर पहुंच गया है, जो पिछले साल से काफी नीचे है। तापमान बढ़ने से और गिरावट की आशंका है। इसी को देखते हुए कलेक्टर सिद्धार्थ जैन ने 1 अप्रैल 2026 से 31 जुलाई 2026 तक पूरे जिले को ‘जल अभावग्रस्त’ घोषित कर दिया है।

इस दौरान नए निजी नलकूप, बोरवेल और हैंडपंप की खुदाई पर पूरी तरह रोक है। बिना अनुमति कृषि या औद्योगिक सिंचाई भी नहीं कर सकेंगे। नियम तोड़ने पर कानूनी कार्रवाई होगी।

नल-जल योजना: 47 लाख खर्च, फिर भी नलों में पानी नहीं

केंद्र की ‘हर घर नल-जल’ योजना हरदा में कागजों तक सीमित दिख रही है। टिमरनी ब्लॉक के बांसपानी पंचायत के बोबदा गांव में 47 लाख की नल-जल योजना 7 मार्च 2025 को पंचायत को हैंडओवर हुई, लेकिन शुरुआती कुछ महीनों बाद सप्लाई ठप हो गई।

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ग्राम पंचायत नयागांव में भी 1800-2000 की आबादी बूंद-बूंद को तरस रही है। योजना शुरू ही नहीं हो पाई, जबकि विभाग ने हैंडओवर बता दिया। मजबूरी में ग्रामीण पड़ोसियों से 300-400 रुपये महीने देकर पाइप से पानी खरीद रहे हैं।कुछ गांव में सरकारी हैंडपंप पर दबंगों का कब्जा है, हैंडपंप में तो मोटर डालकर निजी इस्तेमाल हो रहा है। पानी की टंकी बनी है पर चालू नहीं हुई।

ग्रामीणों ने कई बार सरपंच और अफसरों को शिकायत दी, पर समाधान नहीं निकला। गर्मी बढ़ने पर हालात और बिगड़ने की आशंका है।

राहत की उम्मीद: 2028 तक हरदा बनेगा 100% सिंचित जिला

देवास और हरदा के बीच नर्मदा नदी पर 1250 करोड़ की लागत से बैराज बन रहा है। इससे हरदा मध्य प्रदेश का पहला 100% सिंचित जिला बनेगा। शहीद इलाप सिंह सिंचाई परियोजना के तहत 7.20 करोड़ के संपवेल से 26 हजार हेक्टेयर जमीन सिंचित होगी। 2028 तक काम पूरा होने पर हरदा के 118 गांवों तक पानी पहुंचेगा। बैराज से 25 मेगावाट बिजली भी बनेगी।

प्रदेश स्तर पर स्थिति

मप्र सरकार का दावा है कि 81 लाख से ज्यादा परिवारों तक नल कनेक्शन पहुंच गया है, जो लक्ष्य का 73% है। 10,440 गांव ‘हर घर जल’ घोषित हुए हैं। लेकिन हरदा जैसे जिलों में जमीनी हकीकत अलग है।

ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन नल-जल योजना तुरंत शुरू कराए, दबंगों से हैंडपंप अतिक्रमण से मुक्त कराए और जिम्मेदारों पर कार्रवाई करे।