मकड़ाई समाचार हंडिया।रविवार को देशवासियों ने गोवर्धन पूजा का पर्व बड़े ही हर्ष उल्लास से मनाया।कई स्थानों पर अन्नकूट भी किया गया है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार जब इंद्र देव ने रूष्ट होकर ब्रजवासियों को परेशान करने के लिए भारी बरसात कर दी थी,तब भगवान श्री कृष्ण जी ने इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत अपनी कनिष्ठ उंगली पर उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की थी।तभी से गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता आ रहा है।
धार्मिक दृष्टिकोण से पद्म पुराण के अनुसार गाय के मुख में चारों वेदों का वास हैं। गौमाता के सींगों में भगवान शंकर और विष्णु सदा विराजमान रहते हैं। गाय के उदर में कार्तिकेय,मस्तक में ब्रह्मा,ललाट में रुद्र,सीगों के अग्र भाग में इन्द्र,दोनों कानों में अश्विनीकुमार,नेत्रों में सूर्य और चंद्र,दांतों में गरुड़,जिह्वा में सरस्वती,अपान में सारे तीर्थ,मूत्र-स्थान में गंगा जी,रोमकूपों में ऋषि गण,पृष्ठभाग में यमराज,दक्षिण पार्श्व में वरुण एवं कुबेर,वाम पार्श्व में महाबली यक्ष,मुख के भीतर गंधर्व,नासिका के अग्रभाग में सर्प,खुरों के पिछले भाग में अप्सराएं स्थित हैं।भविष्य पुराण,स्कंद पुराण,ब्रह्माण्ड पुराण, महाभारत में भी गौ के अंग-प्रत्यंग में देवी-देवताओं की स्थिति का विस्तृत वर्णन है।
राजस्व निरीक्षक संतोष पथोरिया ने बताया कि धार्मिक दृष्टिकोण के अलावा वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी गाय एक बहुत उपयोगी पालतू व पूजनीय पशु है।पुराने समय मे जब ज्यादातर मकान कच्चे हुआ करते थे तब लोग अपने घरों की फ़र्श व दीवारों को गोबर से लिपाई पुताई करते थे।जिससे सूक्ष्म जीवाणु व कीटाणुओं का विनाश हो जाता था।गाय के गोबर से बने कंडो से हवन पूजन करने से वायुमंडल में शुद्धता बनी रहती है।कंडो से भोजन व खासकर बाटी बनाई जाती है जो बहुत ही पाचक व स्वादिष्ट होती है।इसके गले पर हाथ फेरने से ब्लड प्रेशर जैसी बीमारी में फायदा होता है। एवं गौमूत्र से भी कई की तरह की बीमारियों से छुटकारा मिलता है।गाय का दूध भैंस या बकरी के दूध से कही अधिक विटामिन युक्त व गुणकारी होता है।

