jhankar
ब्रेकिंग
सेवा संकल्प अभियान का उद्देश्य आमजन को योजनाओं और सेवाओं का समय पर लाभ पहुंचाना - केंद्रीय राज्य मंत... रांची में होटलों पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई में 14 लोग गिरफ्तार,एसएसपी के निर्देश पर नाइट रेड राजस्थान पंचायत चुनाव 2026 :  चुनाव में भड़काऊ प्रचार पर प्रशासन सख्त, सोशल मीडिया पर रहेगी पैनी नज... गुजरात के सुरेंद्रनगर में जिम संचालक पर गंभीर आरोप, 100 महिलाओं के वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने का माम... एशियन गेम्स 2026: आखिरी दिन भारत को 5 गोल्ड, कुल 21 गोल्ड के साथ 85 मेडल होटल के कमरे में युवती से दुष्कर्म का आरोप , शिकायत पर पुलिस ने दर्ज किया मामला 43वीं मंजिल से गिरकर युवक की मौत नोयडा में सुपरनोवा स्पायरा बिल्डिंग की घटना नायरा एनर्जी ने बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम, मध्य प्रदेश में कितना पड़ेगा असर छत से गिरकर घायल युवक की इलाज के दौरान मौत मोबाइल अपडेट करने के बहाने खाते से निकाले 95 हजार

गौमाता धार्मिक व वैज्ञानिक दोनों दृष्टिकोण से बहुत उपयोगी है – पथोरिया

मकड़ाई समाचार हंडिया।रविवार को देशवासियों ने गोवर्धन पूजा का पर्व बड़े ही हर्ष उल्लास से मनाया।कई स्थानों पर अन्नकूट भी किया गया है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार जब इंद्र देव ने रूष्ट होकर ब्रजवासियों को परेशान करने के लिए भारी बरसात कर दी थी,तब भगवान श्री कृष्ण जी ने इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत अपनी कनिष्ठ उंगली पर उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की थी।तभी से गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता आ रहा है।
धार्मिक दृष्टिकोण से पद्म पुराण के अनुसार गाय के मुख में चारों वेदों का वास हैं। गौमाता के सींगों में भगवान शंकर और विष्णु सदा विराजमान रहते हैं। गाय के उदर में कार्तिकेय,मस्तक में ब्रह्मा,ललाट में रुद्र,सीगों के अग्र भाग में इन्द्र,दोनों कानों में अश्विनीकुमार,नेत्रों में सूर्य और चंद्र,दांतों में गरुड़,जिह्वा में सरस्वती,अपान में सारे तीर्थ,मूत्र-स्थान में गंगा जी,रोमकूपों में ऋषि गण,पृष्ठभाग में यमराज,दक्षिण पार्श्व में वरुण एवं कुबेर,वाम पार्श्व में महाबली यक्ष,मुख के भीतर गंधर्व,नासिका के अग्रभाग में सर्प,खुरों के पिछले भाग में अप्सराएं स्थित हैं।भविष्य पुराण,स्कंद पुराण,ब्रह्माण्ड पुराण, महाभारत में भी गौ के अंग-प्रत्यंग में देवी-देवताओं की स्थिति का विस्तृत वर्णन है।

- Install Android App -

राजस्व निरीक्षक संतोष पथोरिया ने बताया कि धार्मिक दृष्टिकोण के अलावा वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी गाय एक बहुत उपयोगी पालतू व पूजनीय पशु है।पुराने समय मे जब ज्यादातर मकान कच्चे हुआ करते थे तब लोग अपने घरों की फ़र्श व दीवारों को गोबर से लिपाई पुताई करते थे।जिससे सूक्ष्म जीवाणु व कीटाणुओं का विनाश हो जाता था।गाय के गोबर से बने कंडो से हवन पूजन करने से वायुमंडल में शुद्धता बनी रहती है।कंडो से भोजन व खासकर बाटी बनाई जाती है जो बहुत ही पाचक व स्वादिष्ट होती है।इसके गले पर हाथ फेरने से ब्लड प्रेशर जैसी बीमारी में फायदा होता है। एवं गौमूत्र से भी कई की तरह की बीमारियों से छुटकारा मिलता है।गाय का दूध भैंस या बकरी के दूध से कही अधिक विटामिन युक्त व गुणकारी होता है।