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शिक्षको को नही मिल रहा वेतन ,पालको ने जमा नही की फीस ,

मकड़ाई समाचार हरदा। वेतन न मिल पाने के कारण आर्थिक स्थिति परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कोविड.19 के चलते मार्च 2020 से सभी स्कूल बंद है।जिसके कारण विद्यार्थियों को खासा नुकसान हुआ है।संभवतः ऐसा पहली बार एक वर्ष में लगभग 5 महिने स्कूल बंद रहा हैै।इस दौरान शिक्षको ने अपने दायित्वों का निर्वहन बख्ूाबी किया है। शिक्षकों ने स्कूल नियमित सेवाएं दी और स्कूल से विद्यार्थियों का नुकसान न हो उन्हे आनलाईन मोबाईल के माध्यम से शिक्षण कार्य कराया है।शिक्षको ने अपना दायित्व बखूबी निभाया और निभा भी रहे मगर उन्हे आज पारिश्रमिक के नाम पर क्या मिल रहा है। स्थिति यह है कि ऐसे कई शिक्षक है जो कि आज बुमश्किल से अपना घर का खर्च उठा पा रहें है। इस समस्या को लेकर निजी विद्यालयो के शिक्षको ने जिलाधीश को ज्ञापन सौंपा ताकि शिक्षको की समस्या का त्वरित समाधान हो सकें। सनफ्लावर स्कूल सहित अन्य निजी स्कूलो के करीब सौ से ज्यादा शिक्षको ने जिला कार्यालय पहुंच कर जिलाधीश के नामं एसडीएम श्यामेंद्र जायसवाल को ज्ञापन दिया। इस दौरान विनिता टांक,विंध्या दुबे,भारती वर्मा,मीना सिलारपुरिया, निखत खान,अनिता जोशी अरुण,मृदुला पटेल,दीपक जोशी,मयंक तिवारी,संदीप बंसल,प्रदीप मीना,वैशाली शर्मा,लक्ष्मी सिंह,प्रियंका राजवैद्य,रितेश तिवारी ,अलकेश शर्मा आदि उपस्थित थें।

पालको ने जमा नही की फीस

निजी विद्यालयो के शिक्षको ने अपना पूरा समय आनलाईन एजुकेशन में दिया और समय पर क्लास लेकर बच्चों शिक्षा को बाधित नही होने दिया।मगर पालको द्वारा आनलाइ्रन क्लास को फिजूल बताकर विद्यार्थियों की फीस जमा नही की जा रही है।शाला प्रबंधन को विद्यार्थियों की फीस न मिलने के कारण शिक्षकों को है।ऐसी स्थिति में हम सभी शिक्षक अपने परिवार को चलाने में असमर्थ हैं।

हम शिक्षक है हमारा काम शिक्षा देना है न कि उग्र प्रदर्शन ,धरना देना

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शिक्षको ने बताया कि हमारी आर्थिक स्थिति बहुत गंभीर है हमारे परिवार पर आर्थिक दबाब बढता जा रहा है।हमारे पास जो जमा पैसा था वह धीरे धीरे खत्म हो चुका है।जिले के सभी स्कूलो में यह स्थिति है कई जगहो पर तो आधा स्कूल का स्टाफ बुला रहे है। कोविड की स्थिति में अनेक शिक्षको को घर बिठा दिया है।शिक्षको का कहना है हम अन्य लोगो के जैसा उग्र प्रदर्शन नही कर सकते क्योकि हमारे विद्यार्थी हमे शिक्षण कराते ही देखते आए है।हम अच्छी शिक्षा व संस्कार देना सिखाते है। आज उन्ही विद्यार्थियों के अभिभावक कैसे गैर जिम्मेदार हो रहे हैं जो समय पर फीस जमा नही कर हमारे परिवार में दुख का कारण बन रहे है। जिस देश का शिक्षक जब दुखी होता है।वहां पर हमेशा असुरक्षा बनी रहती है। शिक्षक समाज को सही दिशा देने का काम करता है।

सरकार की सलाह शिक्षको के गले की फांस बनी

सरकार ने अभी हाल ही में कहा था कि निजी स्कूल अभिभावको से अतिरिक्त फीस न लेगे सिर्फ टयूशन फीस लेगे। अभिभावको ने इसका अभिप्राय लगा लिया कि उन्हे सरकार ने कहा कि कोई फीस जमा नही करना है।सरकार स्पष्ट वक्तव्य क्यूं नही देती हैं। अभिभावको को आनलाईन शिक्षा बेमानी नजर आ रही है।

बच्चे शादी बारात में भले जाए पर स्कूल जाऐगे तो संक्रमित होगें

कितनी अजीब बात है कि अपने परिवार की शादियां हो रही है जिसमें सभी अभिभावक अपने बच्चो को लेकर बसो और रेल में रिजर्वेशन कराकर जा रहे है। जहां शादियो में नाच रहे है साथ में खा पी रहे मस्ती कर रहे हैं वहां कोविड संक्रमण का खतरा नही है। यही बच्चे अगर स्कूल आए तो कोविड का खतरा है। कितनी हास्यापद लग रहा है।आज बच्चे 6 माह स्कूल नही गए तो उनके बैठने की आदत छूट जायेगी ।पढ़ाई में मन नही लगेगा। यह उनके भविष्य के लिए खतरा है।