संवाददाता ब्रजेश पाटिल सिराली
हरदा जिले में इन दिनों गणगौर उत्सव को धूम धाम से मनाया जा रहा है। भुआणा क्षेत्र में गणगौर की झलक सबसे अलग ही देखने को मिलती हैं, पहले यहां गणगौर उत्सव सादगी के रूप में मनाया जाने वाला उत्सव था, लेकिन अब इसका स्वरूप जमाने के साथ बदल गया, हालाकि इस पर्व को मनाने में लोगो की आस्था और विश्वास तो वही है लेकिन इसकी व्यवस्था और पंडालों को सजाने में अब लाखो रूपये खर्च किये जा रहे है।
/भुआणा गणगौर उत्सव मूलतः शिव व पार्वती का त्यौहार है यह पर्व गुजरात, राजस्थान की मिली जुली संस्कृति का पर्व माना जाता है। और इस पर्व को मध्यप्रदेश में विशेषकर मालवा, निमाड़ और भुआंणा अंचल में इसे धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस आयोजन को चैत्र व वैशाख माह में मनाया जाता है।
इस आयोजन में 9 दिनों तक रात्रि में धनियर राजा और रनुबाई के सुन्दर भजनो व मधुर गीतो की धुन पर महिलाएं एवं पुरूषो द्वारा आकर्षक नृत्य व झालरा किया जाता है, गणगौर उत्सव मनाने के लिए परिवार के सदस्यों की मनोकामनाएं पूरी होने पर रनुबाई को पावनी बुलाते है।
आपको बता दें कि रनुबाई माता पार्वती एवं धनियर राजा को भगवान शिव के रूप में पूजे जाते है। घर के एक कमरे में ज्वारे भी बोये जाते है। वही इन ज्वारे की 9 दिनो तक सुहागन महिलाओं द्वारा पूजा की जाती है जिसे गौर पुजना भी कहते है। इस उत्सव में महिलाऐं दिन में आम के बगीचे में जाकर नृत्य पाती भी खेलती है।

