मकड़ाई समाचार ग्वालियर। आमजन की नजर पेट्रोल-डीजल व एलपीजी की महंगाई पर ही केंद्रित है, वहीं खाद्य तेल के दाम बीते एक साल में बिना शोर के दोगुने हो चले हैं। भोजन की थाली में पूड़ी-सब्जी हो या पुलाव, इसमें पहली जरूरत खाद्य तेल की होती है। ऐसे में तेल की बढ़ती कीमत के खेल ने किचन का बजट बढ़ा और थाली का जायका घटा दिया है। तेल व्यापारियों के मुताबिक तेल की कीमतों में लगातार हो रहा इजाफा जारी रहने की आशंका है। चूंकि कोरोना संक्रमण के आंकड़े बढ़ने लगे हैं, ऐसे में फिर आवक कम होने से तेजी हो सकती है। बीते एक सप्ताह में ही तेल की कीमत औसतन 10 रुपये, जबकि दो महीने में 20 रुपये बढ़ चुकी है, जो बताती है कि तेल व्यापारियों ने जमाखोरी शुरू कर दी है।
केवल तेल ने 520 रुपये बढ़ाया किचन का खर्चा
मां-पिता, पति-पत्नी व दो बच्चों वाले एक 6 सदस्यीय परिवार में औसतन 8 किलोग्राम तेल हर महीने लगता है। रिफाइंड तेल पिछले एक साल में करीब 65 रुपये प्रति किलोग्राम महंगा हो गया है। जिसके कारण केवल खाने के तेल ने ही 520 रुपये राशन खर्चे में अतिरिक्त जोड़ दिए हैं। 80 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से 8 किलो तेल 640 रुपये का आता था, जो अब 1160 रुपये का आता है। अन्य सभी किराना भी इसी तरह महंगा हुआ है। जिनके घर में 6 हजार का राशन आता था, वे अब उतने ही राशन के लिए 10 हजार चुका रहे हैं।

