मकड़ाई समाचार शहडोल। शहडोल जिला अस्पताल में 2 माह की एक कुपोषित बच्ची की इलाज के दौरान मौत हो गई है। जानकारी के मुताबिक गोहपारू थाना क्षेत्र के देवदहा गांव में रहने वाली नान बाई ने 10 अक्टूबर को एक बच्ची को जन्म दिया था जो जन्म से ही कुपोषित थी। इसे इलाज के लिए जिला अस्पताल के पीआईसीयू में भर्ती कराया गया था जिसकी मंगलवार की देर रात मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक देवदहा गांव की नान बाई ने 10 अक्टूबर को जिस बच्ची को जन्म दिया था वह प्रीमेच्योर थी और इसे इलाज के लिए जिला अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती भी कराया गया था। लेकिन कुछ दिनों बाद महिला अपनी बच्ची को लेकर घर वापस चली गई थी।
महिला बाल विकास विभाग की टीम को इस बात की भनक नहीं लग पाई की बच्ची बीमार है और कुपोषित है। इस बात की जानकारी आरबीएसके की डॉ प्रियंका मेश्राम को लगी तो उन्होंने बच्ची के मां-बाप से जाकर बातचीत की और उनको तुरंत बच्ची को इलाज के लिए भर्ती कराने के लिए कहा। इसके बाद इस बच्ची को जिला अस्पताल के पीआईसीयू में भर्ती कराया गया लेकिन इलाज के दौरान मंगलवार की देर रात उसकी मौत हो गई है।
क्या कहती हैं परियोजना अधिकारी
इस संबंध में गोहपारू महिला बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी सतवंत कौर का कहना है कि बच्ची के घर जाकर उनके मां-बाप को समझाइश दी गई थी लेकिन वह बच्ची को भर्ती कराने के लिए तैयार नहीं थे उनकी पूरी टीम इस बात को लेकर गंभीर थी और जाकर कई बार समझाइश दी थी सतवंत कौर का कहना है कि आरबीएसके के डॉ प्रियंका बच्ची के घर गईं थी और बच्ची को अस्पताल में भर्ती करवाया था।
उल्लेखनीय है कि शहडोल जिले में नवजात बच्चों की लगातार मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है । कहीं महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी इस बात को लेकर जिम्मेदार हैं तो कहीं स्वास्थ्य विभाग का अमला भी जिम्मेदार माना जा रहा है। वहीं जिला अस्पताल के डॉक्टर भी इन दिनों ठीक से काम नहीं कर रहे हैं और सिविल सर्जन का विरोध करते हुए सिर्फ इमरजेंसी केस ही देख रहे हैं ऐसे में नवजात बच्चों की मौत कैसे रुकेगी यह एक बहुत बड़ा सवाल है।

