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हरदा लव जिहाद दुष्कर्म मामला। क्या डिमांड पूरी होने के चलते नहीं मांगी गई रिमांड

मकड़ाई समाचार हरदा। लव जिहाद दुष्कर्म मामले में हो रही पुलिसिया कार्रवाई ने खुद को ही कटघरे में खड़ा कर लिया है ।  इस मामले में आरोपी को बिना पुलिस रिमांड पर लिए सीधे जेल भेजने को भी जनता के बीच अलग ढंग से देखा जा रहा है। लोग दबी जुबान से डिमांड पूरी होने से  रिमांड न लेने को जोड़के देख रहे हैं।
इस मामले में हरदा सोशल मीडिया के जागरूक यूजर लगातार कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं ।

अनिल जाट एडवोकेट
केदार शंकर सिरोही

सोशल मीडिया फेसबुक पर जहां अधिवक्ता अनिल जाट ने टिप्पणी की है, वहीं  प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता केदार सिरोही ने भी इस मामले पर अपनी टिप्पणी की है।

जनता जनार्दन के बीच अवलोकनार्थ प्रस्तुत जस की तस टिप्पणियां –

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@अनिल जाट अधिवक्ता ने फेसबुक पर पोस्ट कर उठाये सवाल –

#हरदा #लव_जिहाद
पुलीस लगभाग हर छोटे बड़े मामलो में, आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुछताछ के लिए, न्यायालय से आरोपी की पुलिस रिमांड (PR) मांगती है, और न्यायालय पुलिस को रिमांड देते भी हैं,
पुलिस रिमांड (PR) के दौरान आरोपी से घटना के बारे में बारीकी से पूछताछ करती है, घटना में प्रयुक्त साधनों कपड़ो आदि की जप्ति करती है, अगर पूछताछ के दौरान कोई अन्य आरोपी का नाम सहयोगी या किसी भी प्रसार की मदद करने के रूप में या मददगार के रूप में सामने आता हैं तो उसे भी सह आरोपी के रूप जोड़ा जाता है,
परन्तु इस #हरदा #लव_जिहाद के मामले ऐसा नहीं हुआ, पुलिस ने न्यायालय में आरोपी का रिमांड नही मांगा
रिमांड नहीं मांगी इसलिए सख्ती से पूछताछ नही, ना ही कोई संसाधन या वाहन या कपड़ो की जप्ती हुई, जबकि पीड़िता के कथन अनुसार आरोपी ने पीड़ित को कन्नौद और अपनी स्टोन क्रेसर पर ले गया था, तो जाहिर है किसी वाहन से ही ले गया होगा, तो फिर वाहन की जप्ति क्यों नहीं हुई,
अब शक होता है की घटना में प्रयोग वाहन किसी रसूखदार व्यक्ती का था, इसलिए जप्त नही किया, और जाहिर सी बात है इस इतनी बड़ी घटना में आरोपी की किसी ने तो मदद की ही होगी, कोई तो मददगार होगा ही, तो फिर उसे सह आरोपी क्यों नही बनाया, अंत में एक ही बात सामने आती है
आखिर पुलीस ने रिमांड क्यों नहीं मांगा,
क्या माला पहनाने वाले हाथो ने नमक का कर्ज चुकाया है ।

@प्रदेश प्रवक्ता कांग्रेस के केदार सिरोही ने की टिप्पणी –
बुलडोजर की कार्यवाही सिर्फ ध्यान भटकाने के लिए बाकि इसकी आड़ मे जल्दी से चालान पेश करना हैं।

सामान्य मुल्ज़िमो के 90 दिन तक चालान पेश नहीं होते हैं मगर यहां देख लेना फूफाजी / पुलिस कप्तान के आशीर्वाद से जल्द चालान पेश किया जाएगा.

मेरा सवाल फिर वही… आखिर यह रिश्ता क्या कहलाता हैं.देखते जाए सब आपके सामने होगा।