जांजगीर-चांपा। अब तक लड़की की नाबालिग होने पर शादी रूकने की बात सामने आती थी, लेकिन जिले में एक माह में दूसरी बार ऐसा हुआ है कि लड़के के नाबालिग होने के कारण शादी रूकवाई गई। महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने लड़के के गांव जाकर उसके परिवार के लोगों को समझाईश दी और बालिग होने पर शादी करने की सलाह दी। लड़के की उम्र को शादी के लिए पूरा होने में अभी एक माह का समय बाकी है। जबकि 15 जून को बारात जानेवाली थी, इसके पहले ही अधिकारियों ने जाकर शादी रूकवा दी।
बम्हनीडीह ब्लॉक के कपिस्दा गांव के एक युवक की शादी ग्राम उदयबंद पिसौद की एक युवती से तय हुई थी। लड़का- लड़की दोनों पक्ष ने विवाह की अनुमति के लिए चांपा तहसील में आवेदन जमा किया था।
आवेदन के साथ लड़के और लड़की दोनों के मार्कशीट की छायाप्रति भी जमा की गई थी, ताकि दोनों के उम्र का पता चल सके। मार्कशीट में लड़के का जो जन्मतिथि है उसके आधार पर तहलसीदार को लड़के की उम्र 21 वर्ष से कम लगी। उन्होंने इसकी जानकारी महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियों को दी।
सोमवार को तालुका विधिक सेवा समिति चांपा के अध्यक्ष सुबोध मिश्रा, तालुका विधिक सेवा समिति जैजैपुर के अध्यक्ष श्रीमती मंजूलता सिन्हा, जिला बाल संरक्षण अधिकारी गजेन्द्र जायसवाल, परियोजना अधिकारी बम्हनीडीह अमित भगत, टीआई राजेश श्रीवास्त्व की टीम लड़के के गांव कपिस्दा पहुंची।
अधिकारियों की टीम ने लड़के के माता-पिता के साथ ही परिजनों को समझाइश दी और बालिग होने पर ही शादी करने की सलाह दी। अधिकारियों की समझाईश पर लड़के के परिजनों ने भी लड़के की उम्र 21 साल पूरा होने के बाद ही शादी करने की बात कही।
लड़की और लड़के के नाबालिग होने पर सजा का प्रावधान है। कोरोना वायरस संक्रमण के बीच शादी की अनुमति के लिए तहसीलदार से अनुमति अनिवार्य किया गया है। यदि कोरोना काल में अनुमति जरूरी नहीं होता तो नाबालिग लड़के की शादी हो गई होती। क्योंकि ज्यादातर लड़कियों की उम्र कम होने पर शादी रोकी जाती थी।

