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पहाड़ों पर विराजमान है मां बिजासन देवी, यहां पूरी होती हैं सभी मनोकामनाएं, जानिए इतिहास और महत्व ?

मकड़ाई समाचार बुधनी (सीहोर)। देशभर में चैत्र नवरात्रि का पर्व पूरे धूमधाम से मनाया जा रहा है। 22 मार्च से शुरू हुई नवरात्रि का आज दूसरा दिन है। ऐसे में पूजा पाठ करने के लिए श्रद्धालुओं का मंदिरों में तांता लगा हुआ है। लेकिन भारत में कुछ स्थान ऐसे भी है। जहां माता रानी साक्षात अपने भक्तों पर कृपा बरसाती है। आज हम आपको बताने जा रहे है मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में स्थित प्राचीन देवी धाम मां बिजासन देवी के बारे में, जो सलकनपुर में घने पहाड़ों के बीच विराजित है।

यहां देश-प्रदेश से दर्शन के लिए लाखों लोग आते हैं। 1000 फीट की ऊंचाई पर विराजित मां बिजासन धाम में पहुंचने के लिए 14 सौ सीढ़ी पार करना पड़ता है। इसके साथ ही यहां रोपवे की सुविधा भी है। यह मंदिर मध्य प्रदेश की आधी आबादी की कुल देवी का मंदिर भी कहलाता है। यहां जबसे मंदिर स्थापित है, तब से अखंड धुना जलता और दो अखंड ज्योत भी जलती है। बताया जाता है कि करीबन 400 वर्षों से ज्योत और धुना इसी तरह से जल रहा है।

वहीं चैत्र नवरात्रि के अवसर पर विंध्याचल पर्वत सलकनपुर में भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो गया है। यू तो देवी धाम सलकनपुर में साल भर ही भक्तों का तांता लगा रहता है। लेकिन नवरात्रि में मां की भक्तों पर विशेष कृपा रहती है। सलकनपुर देवी धाम को  उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर शक्ति लोक बनाने का काम जोरो पर है। वहीं श्रद्धालु भी इस परिवर्तन को देखकर मध्यप्रदेश सरकार और सीएम शिवराज की जमकर तारीफ करते नजर आ रहे है। श्रद्धालुओं की माने तो देवी धाम अब अपनी भव्यता के लिए विख्यात होता जा रहा है।

जानिए मंदिर की विशेषता : 

कहा जाता है कि राक्षस रक्तबीज के वध के बाद माता जिस स्थान पर बैठी थीं, उसी स्थान को विजयासन के रूप में जाना जाता है। इसी पहाड़ी पर सैकड़ों जगहों पर रक्तबीज से युद्ध के अवशेष नजर आते हैं। नवरात्र में इस स्थान पर लाखों श्रद्धालु मन्नत पूरी होने पर चढ़ावा-चढ़ाने, जमाल चोटी उतारने और तुलादान कराने पहुंचते हैं।

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सलकनपुर देवी धाम प्राचीन होने से पूरे प्रदेश में प्रसिद्ध है। वैसे तो मंदिर में 12 महीने ही श्रद्धालुओं के आने जाने का दौर चलता है, लेकिन नवरात्र में उनकी तादात हजारों लाखों में रहती है। मंदिर के बारे में कहा भी जाता है कि जो श्रद्धालु सच्चे मन से मां के दरबार में आता है, उसकी हर मुराद पूरी होती है। नवरात्र में पैदल तो कोई वाहन में सवार होकर कोई लेट कर सारे भरकर जयकारें लगाकर मां विजयासन के दरबार में मत्था टेकने आते है।

ऐसे पहुंचे मंदिर  : 

रेल मार्ग से भोपाल से 75 किमी की दूरी पर है। होशंगाबाद से 40 किमी की दूरी पर, इंदौर से 180 किमी और सीहोर से 90 किमी की दूरी पर बस द्वारा मां विजयासन धाम पहुंचा जा सकता है।

करोड़ों की लागत में तैयार हो रहा शक्ति लोक का निर्माण 

करोड़ों की लागत में तैयार हो रहे शक्तिलोक का निर्माण जहां प्रगति पथ पर है, जो हर आने जाने वालों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रही है। शक्ति लोक में मां अपने नौ रूपों में विराजमान रहेगी। वहीं सप्तशती महत्व की कथा भी कॉरिडोर में उकेरी जाएगी। साथ ही 52 शक्ति पीठों के चित्र झांकी के दर्शन भी श्रद्धालुओं को देखने को सलकनपुर में मिलेंगे।

शास्त्र सम्मत अन्य देवी देवताओं चौसठ योगिनी सहित मां के सभी रूपों के दर्शन भक्तों को करने के लिए मिलेंगे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी बुधनी विधान सभा क्षेत्र सलकनपुर देवी धाम निर्माण कार्य के लिए अतिरिक्त बजट दिया है। जिसमे वन विभाग से 25 एकड़ जमीन भी मंदिर को दिलाने का काम जोरो पर है। जिसमे पार्किंग प्रसाद की दुकानें भक्तों के ठहरने की उत्तम व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए लिया है।