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मप्र के किसानों को मिलेगी मौसम की सटीक जानकारी

भोपाल। प्रदेश के किसान अब मौसम की पडने मार से बच सकेंगे। किसानों को मौसम की अब पल-पल की सटीक जानकारी उपलब्ध हो सकेगी, इससे उनको होने वाले नुकसान से बचाया जा सकेगा। इसके लिए राज्य सरकार ने ‘विंड्स’ परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना के तहत राज्य सरकार ने खेती, फसल बीमा और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में बड़ा बदलाव करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। मौसम वैज्ञानिक वीएस यादव ने बताया कि यह परियोजना किसानों के साथ-साथ मौसम विभाग के लिए भी बेहद अहम है। उन्होंने कहा कि अभी मौसम विभाग को सीमित इलाकों से ही जानकारी मिल पाती है, जिस कारण हर क्षेत्र की सटीक स्थिति बताना संभव नहीं हो पाता। स्वचालित मौसम केंद्र शुरू होने से हमारा नेटवर्क मजबूत होगा। हमारी पहुंच जिला से आगे बढ़कर सीधे पंचायत स्तर तक हो जाएगी।

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इससे किसानों और आम लोगों को उनके ही क्षेत्र की सही जानकारी दी जा सकेगी। कई बार किसानों की शिकायत रहती है कि उनके गांव या खेत के हिसाब से मौसम का पूर्वानुमान नहीं मिलता। विंड्स लागू होने के बाद यह समस्या खत्म हो जाएगी। मौसम वैज्ञानिक वीएस यादव ने बताया कि प्रदेश में 55 जिले हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 30 जिलों के मुख्यालयों से ही मौसम डेटा उपलब्ध होता है। इसी आधार पर पूरे प्रदेश का पूर्वानुमान तैयार किया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मजबूरी अब खत्म होने जा रही है। विंड्स नेटवर्क के जरिए हर इलाके की स्थानीय स्थिति सामने आएगी, जिससे मौसम विभाग ज्यादा सटीक और भरोसेमंद जानकारी दे सकेगा। वीएस यादव ने कहा कि मौसम की जानकारी किसानों के लिए सबसे निर्णायक होती है। अगर किसान बुवाई करे और अगले दिन बारिश हो जाए, तो उसे भारी नुकसान उठाना पड़ता है। यदि पहले से जानकारी मिल जाए कि बारिश आने वाली है, तो किसान अपनी योजना बदल सकता है, उन्होंने बताया। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया के दौर में जानकारी तेजी से फैलती है और विंड्स शुरू होने के बाद सही सूचना सही समय पर किसानों तक पहुंचेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में विंड्स परियोजना को मंजूरी दी गई है। इस योजना के तहत हर तहसील में स्वचालित मौसम केंद्र लगाए जाएंगे। हर ग्राम पंचायत में ऑटोमेटिक रेन गेज स्थापित होंगे। इन उपकरणों से बारिश, तापमान, नमी और हवा की गति का सटीक रिकॉर्ड तैयार होगा।

विंड्स प्रणाली प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में भी अहम भूमिका निभाएगी। अब तक कई मामलों में तहसील स्तर पर बारिश दर्ज होने के बावजूद पंचायत स्तर पर नुकसान का प्रमाण नहीं होने से किसानों को बीमा लाभ नहीं मिल पाता था। इस परियोजना के तहत पूरा मौसम डेटा एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगा। पंचायत से जानकारी तहसील पहुंचेगी, वहां से भोपाल मुख्यालय और फिर सीधे केंद्र सरकार के दिल्ली मुख्यालय तक साझा की जाएगी। इससे कृषि योजनाओं और आपदा प्रबंधन में भी बड़ा बदलाव आएगा। विंड्स परियोजना को अगले पांच वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस पर करीब 434 करोड़ रुपये खर्च होंगे। जिस में राज्य सरकार 147 करोड़ रुपये और शेष राशि केंद्र सरकार देगी।