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‘दाजी – बदामी’ संवाद

बदामी – दाजी राम राम।दाजी – अरे आ बेटा बदामी ! कां मरयो थो इत्ता दिन स

बदामी – कईं नी न्हई थो, सिलाट नम्बर में माथो दे रयो थो!

दाजी – फेर काई हुयो !

बदामी – माथो रगड़ा रयो ह जब स ही , छिलपट अगल इकली रयि। अरु , वेवस्था ह तो ओको माथो झुकेल ह कन कब से (सर वर डाउन) ! असा म काई करां !

दाजी- मल्लब किरसान हुण पापड़ खायीं घाम म सिका भी रया और तला भी रया ! ऊपर आला होण ख न दिखाती काई

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बदामी – सब मालम उन ख , सुट्टी दाबेल बठया ह ! हवा आंधी अगल मचक रयि, किसान मुश्कल म, फसल बिक न रयि, बद्दल माथा प , कां तक तिरपाल ढांकां !

दाजी – असल म तुमारी उपज मट्टी में उगे, उनकी उपज दिमाग म ! सब खेल समरथन को है! सब ख एक दूसरे के समरथन की जरूरत पड़ ही ह । उनकी काव, तुम्हारी काव ! समे पे मोल करजो। बात को गहराई से समझ !

बदामी – सई की दाजी ! दाजी अब्बी पाल्टी विभाग होण म खूब अपना लोग होण ख सदस्य बना ख बिठा रयि। समाज म हुसियार लोग हुन की कमी ह काई, उनख कोई न पूछे !

दाजी – असो ह, जसा फिलिम म कलाकार की कलाकारी चल अ, उसई समिति में सलाकार की सलाकारी चल अ ! या लोग हुन छटेल रे ह, इनको काम सीसीटीवी को ह, सीधो पिरसारण पाल्टी ख, पाना उतारना खाईं । मौका देख खुद भी चौकों लगई ले गंज काव, पाल्टी से छिपी ख, अब पब्लीग से या बने काई, या उनको कोई करने दे काई, एका लेन असो होय! तौला तौलीको खेल ह

बदामी – जबई संपट नि पड़ती! चलूं दाजी, राम राम

दाजी – माथो ढंक ख, पियाज साथ म रख हिट जा ! हीट भोत ह, नि तो हिटहुटा जायगो, आज रोयनी का तीसरा है!