ज्योति-जोत दिवस – जब गुरुनानक जी ज्योति में समा गए
मकडा़ई एक्सप्रेस 24 धर्म।आज 22 सितंबर का दिन सिख धर्म और पूरे मानव समाज के लिए गहरी श्रद्धा का दिन है। आज ही के दिन 1539 में करतारपुर साहिब में गुरु नानक देव जी ज्योति-जोत में समाए थे। इसे ही हम पुण्यतिथि के रूप में याद करते हैं।
जीवन परिचय
गुरु नानक देव जी का जन्म 1469 में तलवंडी (अब ननकाना साहिब, पाकिस्तान) में हुआ था। वे सिख धर्म के प्रथम गुरु और संस्थापक थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन सत्य, समानता और मानवता के प्रचार में लगाया।
उनके तीन मूल सिद्धांत – जो आज भी प्रासंगिक हैं
1. किरत करो – मेहनत और ईमानदारी से काम करो।
2. नाम जपो – ईश्वर को हमेशा याद रखो।
3. वंड छको – जो कुछ है, उसे जरूरतमंदों के साथ बांट कर खाओ। यही लंगर परंपरा का आधार बना।
पुण्यतिथि का संदेश
गुरु नानक जी ने कहा था – “अव्वल अल्लाह नूर उपाया, कुदरत के सब बंदे, एक नूर ते सब जग उपज्या, कौन भले को मंदे।”
यानी सभी इंसान एक ही ईश्वर की संतान हैं, इसलिए न कोई ऊँचा है, न नीचा। उन्होंने जात-पात, छुआछूत और अंधविश्वास का कड़ा विरोध किया।
आज उनकी पुण्यतिथि पर हमें उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लेना चाहिए –
– गरीब और भूखे को भोजन कराना
– मेहनत की कमाई पर भरोसा रखना
– सभी धर्मों का सम्मान करना
गुरु नानक देव जी शरीर से भले ही चले गए, लेकिन उनकी वाणी गुरु ग्रंथ साहिब में आज भी जीवित है और हमें राह दिखाती है।
वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह।

