अनावश्यक खर्च के लेन-देन को रोककर उसी राशि को सामाजिक और पर्यावरण कार्यों में सदुपयोग
खिरकिया। रूढ़िवादी परंपराओं से हटकर खिरकिया के तिवारी परिवार ने समाज के सामने एक नई मिसाल पेश की है।
परिवार में सुशीला देवी के निधन के बाद आमतौर पर होने वाले दिखावे और फिजूलखर्ची को परिवार ने पूरी तरह बंद कर दिया। तेरहवीं जैसे अवसर पर होने वाले अनावश्यक लेन-देन को रोककर उसी राशि को सामाजिक और पर्यावरण कार्यों से जोड़ने का फैसला लिया गया।
परिवार ने इस कड़ी में गुर्जर गौड़ ब्राह्मण समाज, हरदा को 5100 रुपए की सहयोग राशि सौंपी और कुरुरीतियों को खत्म करने का संकल्प लिया।
सबसे प्रेरणादायक काम – दिवंगत मां की स्मृति को जीवित रखने के लिए परिवार ने श्री सिद्धेश्वर धाम में ‘बाई की बगिया’ विकसित करने का फैसला किया है। परिवार के सदस्यों ने खुद धाम में पौधारोपण कर हरियाली बढ़ाने का संकल्प लिया।
_”परिवार का मानना है कि दिवंगत आत्मा की सच्ची श्रद्धांजलि दिखावे में नहीं, बल्कि समाज सेवा और प्रकृति संरक्षण में है”।_
समाज सुधार और पर्यावरण संरक्षण के इस फैसले की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है।

