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कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद को हाईकोर्ट से लगा तगड़ा झटका

भोपाल/जबलपुर। मध्यप्रदेश के जबलपुर हाईकोर्ट ने भोपाल मध्य विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद को बड़ा झटका देते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। यह आदेश भोपाल में फर्जी तरीके से इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज के सचांलन को लेकर दिये गये है। गौरतलब है कि पिछले दिनों उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेज की मान्यता रद्द कर दी थी। हालांकि छात्रो के हित को देखते हुए कॉलेज को कंटिन्यू करने के आदेश दिये गये, लेकिन कॉलेज में नए एडमिशन पर पूरी तरह से रोक है। अपने फैसले में हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी कहते हुए कहा कि बिना राजनीतिक संरक्षण इतने सालों तक ऐसे कॉलेज नहीं चल सकता है। हाईकोर्ट ने आरिफ मसूद सहित उसे संरक्षण देने वाले सभी जिम्मेदार अधिकारियों पर भी भ्रष्टाचार की धाराओं में एफआईआर दर्ज करने का आदेश भोपाल कमिश्नर को दिया हैं।

ऐसे सामने आया था फर्जीवाड़ा
जानकारी के अनुसार भोपाल के इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज की जांच के बाद शिक्षा विभाग के द्वारा 9 जून 2025 को आदेश जारी करते हुए उसकी मान्यता को रद्द कर दिया था। कॉलेज की मान्यता रद्द होने पर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद हाईकोर्ट पहुंचे थे। फर्जी सेल डीड के आधार पर कॉलेज चलाने के मामले में सुनवाई के दौरान सारा भ्रष्टाचार उजागर हो गया। जिसके बाद हाइकोर्ट ने आरिफ मसूद सहित उसे संरक्षण देने वाले सभी जिम्मेदार अधिकारियों पर पर भी भ्रष्टाचार की धाराओं में एफआईआर दर्ज करने का आदेश भोपाल कमिश्नर को दिया हैं। कोर्ट ने विधायक आरिफ मसूद और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तीन दिन के अंदर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। साथ ही, कोर्ट ने इस जांच की निगरानी के लिए एसआईटी गठित की है।

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पहले मसूद को मिल चुका था मौका
मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया की आरिफ मसूद ने अमन एजुकेशन सोसाइटी के अंतर्गत चल रहे प्रियदर्शनी कॉलेज की मान्यता के लिए जो पहली सेल डीड जमा की थी वह 2 अगस्त 1999 की थी। कोर्ट ने पाया कि यह सेल डीड फर्जी थी, क्योंकि खसरा नंबर 26 जिसका क्षेत्रफल 2.83 एकड़ है। उसमें खरीदार अमन एजुकेशन सोसाइटी के सेक्रेटरी आरिफ मसूद को दिखाया गया था, जबकि इसकी असली सेल लीड में खरीदार आरिफ मसूद की पत्नी रुबीना मसूद थी। इस फर्जीवाड़े के बाद भी कार्यवाही करने की जगह सरकार ने उसे दोबारा से सेल डीड जमा करने का मौका दिया। आरिफ मसूद ने कॉलेज की मान्यता के लिए दोबारा एक दस्तावेज जमा किया जिसमें क्या दिखाया गया था, कि 7 नवंबर 1999 को विलेज कोहेफिजा में आरिफ मसूद ने इस खसरा नंबर 26 को राबिया सुल्तान से खरीदा था। 2004 में दोबारा जमा की गई इस सेल डीड की लगभग 20 सालों तक किसी ने जांच ही नहीं की और इसी दस्तावेज के सहारे आरिफ मसूद का कॉलेज बे रोकटोक चलता रहा।

मामले में भ्रष्टाचार जड़ तक फैल चुका है-हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में भ्रष्टाचार जड़ तक फैल चुका है। जब पहली बार फर्जी डीड जमा की गई थी, तब संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई करनी चाहिए थी। हाईकोर्ट ने भोपाल कमिश्नर को आदेश दिया कि 3 दिनों में आरिफ मसूद के खिलाफ आईपीसी की धारा 420,467, और 468 के तहत मामला दर्ज किया जाए। कोर्ट ने मामले में एसआईटी गठित करने का भी आदेश दिया। जबलपुर हाईकोर्ट ने हैरत जताते हुए कहा कि प्रथमदृष्टया ऐसा लग रहा है कि इस मामले में भ्रष्टाचार जड़ों तक फैला हुआ है। पहली बार फर्जी दस्तावेज जमा करने पर जिस व्यक्ति पर कार्यवाही की जानी चाहिए थी उसे सरकार ने दोबारा दस्तावेज जमा करने का मौका दिया। इसके बाद दोबारा जमा की गई सेल डीड को 20 सालों तक किसी ने जांचा तक नहीं। कोर्ट ने इस मामले में तत्कालीन सरकार सहित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ा रुख अपनाते हुए अपने आदेश में कहा की प्रथमदृष्टया ही यह धोखाधड़ी का मामला है, इसलिए भोपाल कमिश्नर को आदेश दिया जाता है, कि तीन मामले में इतने लंबे समय तक लापरवाही बरतने और आरिफ मसूद का साथ देने वाले सभी जिम्मेदार अधिकारियों को भी इस मामले में शामिल किया जाए और उन पर भी आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।