“भाजपा वरिष्ठ बड़े नेता कब क्या निर्णय ले इसका सहज अंदाजा नही लगाया नही जा सकता है”
मकड़ाई एक्सप्रेस 24 इन्दौर ।
दतिया उपचुनाव के नामांकन के दिन भाजपा का मंच अचानक मध्य प्रदेश की राजनीति का सबसे चर्चित मंच बन गया। यहां भावनाओं और सियासत का ऐसा संगम दिखा कि हर किसी की निगाहें ठहर गईं।
भावुक हुए नरोत्तम, थम गई आवाज़
मंच पर जब पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा बोलने खड़े हुए तो माहौल एकदम बदल गया। कभी दतिया की राजनीति को दिशा देने वाले नरोत्तम मिश्रा ने कार्यकर्ताओं से कहा – _”मैं हर घर जाऊंगा, हर मतदाता के सामने शीश नवाऊंगा और भाजपा की जीत सुनिश्चित करूंगा।”_
बात कहते-कहते उनका गला भर आया। आवाज़ लड़खड़ाई और उन्हें बीच में ही भाषण रोककर कुर्सी पर बैठना पड़ा। दतिया में दशकों तक दबदबा रखने वाले नेता को इस तरह भावुक देखकर कार्यकर्ताओं की आंखें भी नम हो गईं।
मुस्कुराती रहीं इमरती देवी
ठीक उसी समय मंच पर मौजूद पूर्व मंत्री इमरती देवी के चेहरे पर सहज मुस्कान थी। नरोत्तम मिश्रा के भावुक होने के दौरान भी वह सामान्य दिखीं और हल्का मुस्कुराती रहीं। कैमरों में कैद यह एक पल तुरंत वायरल हो गया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।
क्या था इस तस्वीर का मतलब…..?
सवाल अब यही है कि क्या यह सिर्फ एक संयोग था या भाजपा के भीतर चल रही खींचतान का सार्वजनिक संकेत?
दतिया में नरोत्तम मिश्रा का कद हमेशा सबसे बड़ा माना जाता रहा है। लेकिन इस बार वह खुद अपनी जमीन बचाने के लिए संघर्ष करते दिखे। वहीं कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आईं इमरती देवी की मौजूदगी और उनकी प्रतिक्रिया ने इस सीन को और पेचीदा बना दिया।
आशुतोष तिवारी ने साधा बैलेंस
भीतर की इस खामोश टकराहट को भांपते हुए भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने मंच से नरोत्तम मिश्रा को अपना _”अभिभावक और मार्गदर्शक”_ बताया। उन्होंने खुलकर कहा कि इस चुनाव में नरोत्तम मिश्रा ही अभियान का चेहरा होंगे। संगठन का यह संदेश साफ था – अंदर कोई नाराज़गी नहीं है, सब एकजुट हैं।
विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दतिया में भाजपा की सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस नहीं, बल्कि अपनी एकजुटता है। नरोत्तम मिश्रा का भावुक होना उनके बदले हुए राजनीतिक कद को दर्शाता है। और इमरती देवी की मुस्कान ने इस बदलते समीकरण को सबके सामने रख दिया।
अब आगे क्या……?
दतिया का यह नामांकन मंच सिर्फ फॉर्म भरने का आयोजन नहीं रहा। यह भाजपा के भीतर बदलते शक्ति संतुलन का प्रतीक बन गया।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या नरोत्तम मिश्रा पहले की तरह वोटरों को जोड़कर भाजपा की नैया पार लगाएंगे, या दतिया की बदलती सियासत उनके प्रभाव को कम कर देगी। और इमरती देवी की वो मुस्कान – क्या वो महज एक प्रतिक्रिया थी या एक बड़ा राजनीतिक संदेश….?
एक मंच, दो चेहरे, दो अलग प्रतिक्रियाएं। दतिया ने बता दिया कि चुनाव सिर्फ वोट का नहीं, बल्कि साख और सम्मान का भी है।

