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रीवा : मांगों को लेकर कर्मचारियों ने कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर किया प्रदर्शन

रीवा। रीवा जिले में इन दिनों प्रशासन और कर्मचारियों के बीच ठन गई है। कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी की कड़क कार्यशैली और अनुशासन को लेकर बरती जा रही सख्ती ने जिले के सरकारी महकमों में खलबली मचा दी है। जहाँ एक ओर आम जनता कलेक्टर की सक्रियता से राहत महसूस कर रही है, वहीं दूसरी ओर जनपद पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी लामबंद होकर विरोध पर उतर आए हैं।

सुबह-सुबह दफ्तरों में दबिश, कर्मचारियों की लगी ‘क्लास’
जिले की कमान संभालते ही कलेक्टर ने कार्यप्रणाली में सुधार के लिए औचक निरीक्षण का सहारा लिया।

समय की पाबंदी: कलेक्टर जब सुबह सरकारी दफ्तरों में पहुँचे, तो अधिकांश कुर्सियाँ खाली मिलीं। उन्होंने समय पर न आने वाले कर्मचारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए स्पष्ट कर दिया कि “सरकारी नौकरी का मतलब अब जिम्मेदारी होगा, केवल वेतन लेना नहीं।”

जनसुनवाई में खुलासा: जनसुनवाई में उमड़ रही भारी भीड़ ने यह साबित कर दिया कि जिले में जनता के काम लंबे समय से लंबित थे, जिससे प्रशासनिक सुस्ती उजागर हुई है।

मनरेगा रैंकिंग में पिछड़ने पर भड़के कलेक्टर
समीक्षा बैठक के दौरान जब यह सामने आया कि मनरेगा कार्यों में रीवा जिला मध्य प्रदेश में नीचे से दूसरे पायदान (52वें स्थान) पर है, तो कलेक्टर का पारा चढ़ गया।

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कड़ा संदेश: उन्होंने दो टूक कहा कि जो कर्मचारी काम नहीं करेंगे, उन्हें वेतन नहीं दिया जाएगा। ‘काम के बदले वेतन’ की नीति को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

सख्ती के खिलाफ लामबंद हुए कर्मचारी संगठन
कलेक्टर के कड़े तेवरों से नाराज जिला और जनपद पंचायत के कर्मचारी संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है।

ज्ञापन सौंपा: नाराज कर्मचारी प्रतिनिधि संभागीय कमिश्नर कार्यालय पहुँचे और कलेक्टर के खिलाफ ज्ञापन सौंपा।

आरोप: कर्मचारियों का कहना है कि उन पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है और कार्यशैली व्यवहारिक नहीं है।

जनता बनाम कर्मचारी: क्या बदलेगी तस्वीर?
रीवा में इस खींचतान ने एक बड़ी बहस छेड़ दी है। आम नागरिकों का मानना है कि यदि कर्मचारी समय पर अपनी जिम्मेदारी निभाएं, तो लोगों को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। प्रशासन में आ रहे इस बदलाव का असर अब दिखने लगा है, लेकिन देखना यह होगा कि कर्मचारियों का विरोध प्रशासन को झुकाता है या अनुशासन की यह नई व्यवस्था जिले की सूरत बदलती है।