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टिमरनी में प्रशासन के आदेश हवा में,प्रतिबंध के बाद भी नहीं रुक रही नरवाई जलाने की घटनाएं

छिदगांव में दिन भर जलती रही नरवाई, खेतों से उठा धुएं का गुबार

मकडा़ई एक्सप्रेस 24 टिमरनी । प्रदेश सरकार ने खेतों में नरवाई जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है, इसके बावजूद हरदा जिले में नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। जिले की टिमरनी तहसील के अंतर्गत गंजाल नदी किनारे बसे ग्राम छिदगांव में रविवार को दिन भर खेतों में नरवाई जलाए जाने की घटनाएं सामने आईं। दोपहर से देर शाम तक कई खेतों से धुएं के गुबार उठते रहे, जिससे पूरे क्षेत्र में धुंध जैसी स्थिति बनी रही।

प्रशासन की अपील का नहीं हो रहा असर

नरवाई जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन लगातार सक्रिय है। कलेक्टर, एसडीएम और जिले के सभी तहसीलदारों द्वारा किसानों को पहले ही स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि फसल कटाई के बाद खेतों में बची नरवाई को आग न लगाएं। प्रशासन ने गांव-गांव में मुनादी और किसान चौपाल के माध्यम से भी अपील की है कि नरवाई जलाने से बचें। आदेश न मानने पर जुर्माना और एफआईआर तक की कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। बावजूद इसके छिदगांव और आसपास के खेतों में किसान खुलेआम नरवाई में आग लगाते नजर आए।

किसानों की मजबूरी या लापरवाही

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कुछ किसानों का कहना है कि अगली फसल की बुवाई के लिए खेत जल्दी खाली करना पड़ता है और नरवाई हटाने के लिए मजदूर नहीं मिलते, इसलिए वे आग लगाते हैं। जबकि कृषि विभाग का कहना है कि नरवाई जलाने से खेत की उर्वरा शक्ति खत्म हो जाती है। खेत में मौजूद लाभदायक कीट, केंचुए और जैविक तत्व जलकर नष्ट हो जाते हैं। इससे जमीन की उत्पादन क्षमता लगातार घट रही है।

आगजनी और पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा

नरवाई जलाने से सबसे बड़ा खतरा आग फैलने का है। तेज हवा में चिंगारी उड़कर पास में खड़ी गेहूं, चना या गन्ने की फसल तक पहुंच जाती है। जिले में पिछले सालों में नरवाई की आग से कई एकड़ फसल जलकर खाक हो चुकी है। इसके अलावा निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण को बढ़ाता है, जिससे लोगों को सांस संबंधी बीमारियां होती हैं। गंजाल नदी किनारे बसे गांवों में रविवार को उठे धुएं के कारण ग्रामीणों को आंखों में जलन और घुटन की शिकायत भी हुई।

क्या हो कार्रवाई

प्रशासन को चाहिए कि संबंधित क्षेत्र से जानकारी लेकर नरवाई जलाने वाले खेत को चिन्हित कर हिदायती कार्यवाही करनी चाहिए अब केवल अपील नहीं, बल्कि मैदानी स्तर पर सख्त निगरानी की जाए। पटवारी और कृषि विस्तार अधिकारियों को खेतों में भेजकर नरवाई जलाने वालों पर मौके पर ही कार्रवाई की जाए, ताकि अन्य किसानों में संदेश जाए।