हंडिया न्यूज़ : ग्राम चौकी के आदिवासी गोंड समाज ने तहसीलदार को सौंपा आवेदन —मरघट श्मशान भूमि “मिट्टी दफनाने हेतु शासकीय भूमि उपलब्ध कराई जाए”
हंडिया/बेसवा।ग्राम पंचायत बेसवा के ग्राम चौकी के आदिवासी गोंड समाज ने अपनी पारंपरिक ‘मिट्टी संस्कार’ पद्धति को बचाने के लिए तहसीलदार हंडिया को आज एक लिखित आवेदन सौंपा है। आवेदन में समाजजनों ने बताया कि उनकी संस्कृति में मृतकों का मिट्टी में दफनाना सदियों पुरानी परंपरा रही है, जो आज भी उनकी धार्मिक आस्था और सामाजिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
गाँव में दफनाने हेतु भूमि नहीं, मजबूरी में करना पड़ रहा है अग्नि संस्कार
आवेदन में उल्लेख किया गया है कि ग्राम चौकी में मिट्टी दफनाने के लिए न तो शासकीय और न ही सामुदायिक भूमि उपलब्ध है। भूमि के अभाव में समाजजनों को मजबूरन अग्नि दाह संस्कार करना पड़ रहा है, जो उनकी संस्कृति के विपरीत है। इससे न केवल उनकी परंपरा प्रभावित हो रही है, बल्कि समाज में मानसिक आघात भी उत्पन्न हो रहा है।
संविधान के तहत धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार
आदिवासी गोंड समाज ने आवेदन में संविधान के अनुच्छेद 25 एवं 26 का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के अनुसार अंतिम संस्कार करने का मूल अधिकार प्राप्त है। लेकिन उपयुक्त भूमि न होने के कारण वे अपनी परंपरा का पालन नहीं कर पा रहे हैं।
शमशान/मरघट भूमि आवंटित करने की मांग
समाजजनों ने तहसीलदार महोदय से अनुरोध किया है कि ग्राम चौकी या आसपास के किसी उपयुक्त स्थान पर आदिवासी गोंड समाज के लिए मिट्टी दफनाने हेतु शासकीय मरघट/शमशान भूमि का शीघ्र आवंटन किया जाए, ताकि वे अपनी परंपरा को संरक्षित रख सकें।
प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा
समाज का कहना है कि शमशान भूमि उपलब्ध होने से उनकी सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रहेगी और अंतिम संस्कार के समय होने वाली परेशानियाँ भी दूर होंगी। समाज ने आशा व्यक्त की है कि प्रशासन उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए जल्द सकारात्मक निर्णय लेगा। इस दौरान देवी सिंह परतें मदन इवने
दीपक मर्सकोले नरेन्द्र मर्सकोले कमल मर्सकोले भगतराम इवने
जयकुमार व सुरेश उइके सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

