jhankar
ब्रेकिंग
बाबा रामदेव के अवतरण दिवस पर भीलटदेव धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब राजस्थान की तर्ज पर बने भव्य मंदि... अयोध्या धाम में हरदा का गौरव बढ़ा :  रक्तमित्र परमानंद सिंह बघेल को मिला राष्ट्रीय सेवा रत्न सम्मान-... अधूरी सड़क और पुलिया निर्माण को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश गुणवत्ता पर सवाल, नपाई की दिशा से हटकर नि... प्रेमिका ने पहाड़ी पर मिलने बुलाया, चार दिन बाद पत्थरों के नीचे मिला प्रेमी का शव, पन्ना में 21 वर्ष... हर मुश्किल का समाधान संभव, चुप न रहें, अपनों से करें मन की बात छात्रों की आवाज बने हैं राहुल गांधी- मोहन साई हंडिया से खरनाल तक आस्था का सफर: मां नर्मदा की आरती के बाद तेजाजी महाराज की ध्वज यात्रा रवाना विकास को लेकर भाजपा मंडल अध्यक्ष ने विधायक को दी बहस की चुनौती बाबा रामदेव जन्मोत्सव आज: शोभायात्रा और भंडारा, रात में होगा जम्मा जागरण आज टिमरनी से निकलेगी रामदेव मंदिर के लिए पैदल ध्वज यात्रा

Harda: गेहूं की फसल में जड़माहू कीट से बचाव के लिए सलाह

हरदा / रबी मौसम वर्ष 2023-24 अंतर्गत जिले में कृषको द्वारा गेंहू, चना, सरसो, मक्का एवम मटर आदि फसलों की बोनी की गई है।

- Install Android App -

    सहायक संचालक कृषि विभाग श्री अखिलेश पटेल ने कृषकों को सलाह दी है कि गेंहूॅ फसल के खेतों में स्थान – स्थान पर पौधे पीले होकर जड़ माहू कीट गेंहूॅ के पौधे के जड़ भाग में चिपका हुआ रहता है, जो निरन्तर रस चूसकर पौधे को कमजोर व सुखा कर देता है। प्रभावित खेतों में पौधे को उखाड़कर ध्यान से देखने पर बारीक – बारीक हल्के पीले, भूरे व काले रंग के कीट चिपके हुए दिखाई देते हैं। मौसम में उच्च आर्द्रता व उच्च तापमान होने पर यह कीट अत्यधिक तेजी से फैलता है। जड़ माहू कीट नियंत्रण के लिए कृषक भाई इमिडाक्लोरोप्रिड 17.8%, 40 एम.एल. या क्लोरोपायरिफोस 25% इ. सी., 600 एम.एल. प्रति एकड़ मात्रा का 100 से 125 लीटर पानी का घोल तैयार कर छिड़काव करें।
श्री पटेल ने बताया कि चना एवं गेहूं फसल में इल्ली प्रकोप के लिए कीटनाशक इमामेक्टीन, 80 ग्राम प्रति एकड़ या इन्डोक्साकर्ब, 110 ग्राम प्रति एकड़ मात्रा का 100 से 125 लीटर पानी का घोल तैयार कर छिड़काव करें। चना एवं गेहूं  दोनो फसलों  में फफुंद जनित बीमारियों के नियंत्रण के लिए फफूंदनाशक टेब्यूकोनाजोल+सल्फर, 400 ग्राम या थायोफेनेट मिथाइल + मेनकोजेब, 200 ग्राम प्रति एकड़ की अनुशंसित मात्रा का 100 से 125 लीटर पानी का घोल तैयार कर छिड़काव करें।