jhankar
ब्रेकिंग
शीर्षक: पेपर लीक पर सख्ती, PM मोदी का बड़ा ऐलान - फास्ट ट्रैक कोर्ट बनेंगे, दोषियों को कड़ी सजा बिजली कंपनी के इस अधिकारी पर आय से अधिक संपत्ति का आरोप, जांच में 17.12 करोड़ की संपत्ति मिली लोकायु... हरदा: ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकराई बाइक, 30 वर्षीय युवक की मौत, स्कूल में सुरक्षा गार्ड की करता था नौकरी भाजपा किसान मोर्चा हरदा ग्रामीण मंडल अध्यक्ष बने सुरेश पुनासे, जिले के 12 मंडल अध्यक्षों की सूची जार... किसानों के साथ ये कैसा मजाक? 70–80 रुपये प्रति एकड़ बीमा मिलने पर फूटा गुस्सा, तहसीलदार को सौंपा ज्ञ... हरदा कोतवाली पुलिस की बड़ी सफलता: 4 घंटे में नकबजनी का खुलासा, 3 आरोपी गिरफ्तार, ₹1.30 लाख का चोरी क... इंदौर: शादी का झांसा देकर युवती से दुष्कर्म, फोटो वायरल करने की धमकी देकर करता रहा शोषण रहटगांव को मिले नए तहसीलदार, शंकर सिंह रघुवंशी ने संभाला पदभार दिल्ली: जंतर-मंतर पर 'चलो संसद' प्रदर्शन के दौरान प्रतिष्ठित न्यूज चैनल के रिपोर्टर पर हमला हंडिया : गौशाला होने के बावजूद सड़कों पर गौवंश का कब्जा, आखिर किसकी जिम्मेदारी?

जंग में ईरान को हुआ 270 अरब डॉलर का नुकसान, संयुक्त राष्ट्र में उठाई मुआवजे की मांग

जेनेवा। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान का दावा करते हुए करीब 270 अरब डॉलर के मुआवजे की मांग की है। यह मांग संयुक्त राष्ट्र में उठाई गई, जहां ईरान के प्रतिनिधि ने आरोप लगाया कि हमलों में न केवल अमेरिका और इजराइल, बल्कि कुछ क्षेत्रीय देशों की भी भूमिका रही है।

- Install Android App -

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ईरान सरकार की प्रवक्ता फातमेह मोहाजेरानी ने कहा कि 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद देश को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि युद्ध के कारण बुनियादी ढांचे, व्यापार और तेल निर्यात पर गंभीर असर पड़ा है, जिससे नुकसान का आंकड़ा 270 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के दूत ने दावा किया कि पांच क्षेत्रीय देशों की जमीन का इस्तेमाल ईरान पर हमले करने के लिए किया गया। ऐसे में इन देशों को भी इस नुकसान की भरपाई करनी चाहिए। हालांकि, इन देशों के नाम सार्वजनिक रूप से नहीं बताए, जिससे क्षेत्र में कूटनीतिक तनाव और बढ़ सकता है।

इस बीच ईरान ने मुआवजा वसूलने के लिए एक नया प्रस्ताव रखा है। इसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर टैक्स लगाने की योजना है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है, इसलिए इस प्रस्ताव के लागू होने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजार पर व्यापक असर पड़ सकता है। हालांकि इस बढ़ते तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच संभावित बातचीत की भी खबरें सामने आ रही हैं। क्षेत्रीय देशों की ओर से मध्यस्थता के प्रयास जारी हैं, लेकिन ईरान फिलहाल अपने रुख पर कायम है और पहले नुकसान की भरपाई की मांग कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह विवाद जल्द नहीं सुलझा, तो इसका असर न केवल मध्य पूर्व, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर भी पड़ सकता है।