इंदौर। देश में सर्वाधिक कॉटन उत्पादन के लिए चर्चित मालवा निमाड़ अंचल अब देश का प्रमुख टेक्सटाइल हब बनने जा रहा है। जहां पहली बार 2100 एकड़ के व्यवसायिक क्षेत्र में 114 टेक्सटाइल कंपनियां अपनी यूनिट स्थापित करने जा रही हैं। जिससे मध्य प्रदेश के आदिवासी अंचल के साथ अन्य इलाकों में होने वाली कपास की पैदावार से उन्नत किस्म का कपड़ा तैयार किए जाने के बाद देश और दुनिया में एक्सपोर्ट किया जा सकेगा।
कपास उत्पादन में मध्य प्रदेश का योगदान 40%
दरअसल, देश के कपास उत्पादन में मध्य प्रदेश का योगदान लगभग 40 प्रतिशत है। इनमें प्रमुख रूप से इंदौर, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, खरगौन, बड़वानी, खण्डवा और बुरहानपुर शामिल हैं। पिछले 3 वर्षों में कपास उत्पादन की स्थिति अच्छी रही है। वर्ष 2022-23 में 8.78 लाख मीट्रिक टन, 2023-24 में 6.30 लाख मीट्रिक टन और 2024-25 में 5.60 लाख मीट्रिक टन कपास उत्पादन हुआ।
किसानों का संपर्क अंतरराष्ट्रीय बाजार से होगा
मध्य प्रदेश के जिनिंग मिलो के जरिए शुद्ध कपास महाराष्ट्र, गुजरात और अन्य राज्यों में बेच दिया जाता है। जाहिर है इससे स्थानीय किसानों को उनके उत्पादन का पर्याप्त मुनाफा भी नहीं मिल पाता था। हालांकि अब धार जिले के बदनावर में करीब 2,158 एकड़ में विकसित हो रहे पीएम मित्र पार्क के कारण कपास उत्पादक किसानों का सीधा संपर्क अंतरराष्ट्रीय बाजार से हो जायेगा।
वहीं, किसानों की उपज खेतों से सीधे वैश्विक बाजार तक पहुँच जायेगी. इसके अलावा खरगोन, बड़वानी, सेंधवा आदि इलाकों में जो जिनिंग मिल अब तक बंद होने की कगार पर आ चुकी थी, उन्हें भी नीचे से शुरू होने वाले व्यापार की संजीवनी मिल सकेगी।

