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गिद्ध संरक्षण के लिए नई पहल: MP में एप के जरिए होगी 7 प्रजातियों की मॉनिटरिंग

भोपाल। वल्चर स्टेट की उपाधि रखने वाले मध्य प्रदेश में इस बार फिर गिद्धों की गणना का काम शुरु होने वाला है। खास बात ये है कि, इस बार मोबाइल एप की मदद से गिद्धों की गिनती की जाएगी। प्रदेश के शहडोल, अनूपपुर, उमरिया और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के करीब 50 से अधिक अधिकारी – कर्मचारियों को इसके लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। ये प्रदेशव्यापी शीतकालीन गिद्ध गणना साल 2025-26 के लिए आयोजित की गई है। इस नई तकनीक से गिद्धों की गणना में पारदर्शिता आएगी और समय की बचत होगी।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के ईको सेंटर ताला में आयोजित इस कार्यशाला में वन वृत्त शहडोल के उत्तर शहडोल, दक्षिण शहडोल, उमरिया, अनूपपुर और बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व उमरिया के सभी उप वन मण्डलाधिकारी और परिक्षेत्र अधिकारी शामिल हुए। वल्चर कमेटी के सदस्य और मास्टर ट्रेनर दिलशेर खान ने मध्य प्रदेश में पाए जाने वाले गिद्धों की प्रजातियों और उनके रहवास के बारे में जानकारी दी। मोहन नागवानी ने गिद्ध गणना में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल एप्लीकेशन Epicollect5 Data के संचालन का प्रशिक्षण दिया।
20 से 22 फरवरी के बीच होगी गणना

- Install Android App -

क्षेत्र संचालक बांधवगढ टाईगर रिजर्व, डॉक्टर अनुपम सहाय ने गिद्ध संरक्षण में प्रदेशव्यापी गिद्ध गणना के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि, वो मैदानी अमले को भी इस नई तकनीक का प्रशिक्षण दें। मध्य प्रदेश में 20 फरवरी से 22 फरवरी तक मोबाइल एप्लीकेशन का उपयोग करके गिद्धों की गिनती की जाएगी। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय अधिकारियों और वन कर्मचारियों को गणना की नई पद्धतियों से परिचित कराना था।

कर्मचारियों को दी गई विशेष ट्रेनिंग

प्रशिक्षण के दौरान, विशेषज्ञों ने एसडीओ, रेंजर और वन कर्मचारियों को ऐप के संचालन, डेटा अपलोड करने और फोटो के माध्यम से जानकारी दर्ज करने की विस्तृत जानकारी दी। अधिकारियों को बताया गया कि गणना के समय कर्मचारी मौके पर ही गिद्धों की फोटो खींचकर ऐप में जरूरी जानकारी भरेंगे। इससे काम में और भी ज्यादा पारदर्शिता आएगी और समय भी बचेगा।