हाईकोर्ट ने SIT जांच का दिया आदेश – आरोपी नहीं निकला भ्रूण का पिता
_बागेश्वर धाम में नाबालिग किशोरी से दुष्कर्म के सनसनीखेज मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने छतरपुर एसपी को विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने के आदेश दिए हैं।_
मकडा़ई एक्सप्रेस 24 छतरपुर। मध्यप्रदेश के चर्चित धार्मिक स्थल बागेश्वर धाम में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया है। कोर्ट ने आरोपी की जमानत दूसरी बार खारिज करते हुए छतरपुर एसपी को विशेष जांच टीम गठित कर 2 महीने में असली गुनहगार और भ्रूण के जैविक पिता का पता लगाने का आदेश दिया है, क्योंकि FSL रिपोर्ट में आरोपी राजू जाटव भ्रूण का पिता नहीं निकला और पीड़िता के बयानों में भी विरोधाभास सामने आया है।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
जबलपुर हाईकोर्ट के जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकल पीठ ने सुनवाई करते हुए आरोपी राजू जाटव की दूसरी जमानत अर्जी खारिज कर दी।
कोर्ट ने आदेश दिया कि –
– छतरपुर एसपी तुरंत एक विशेष टीम बनाएं
– टीम पता लगाए कि नाबालिग का यौन उत्पीड़न किसने किया
– उसके गर्भ से मिले भ्रूण का असली जैविक पिता कौन है
– जांच 2 महीने के अंदर पूरी की जाए
पूरा मामला क्या है….?
अभियोजन के मुताबिक, यह घटना मार्च 2026 की है।जानकारी के अनुसार 15 मार्च को 16 साल की नाबालिग अकेली बागेश्वर धाम दर्शन करने पहुंची थी। जिसकी 17 मार्च को बागेश्वर धाम में मुलाकात राजू जाटव से हुई। आरोप है कि राजू उसे घर छोड़ने के बहाने अपने साथ ले गया। करीब 15 दिन तक अपने पास रखा। इसके बाद ट्रेन से पचोर ले गया।इधर परिजनों ने गुमशुदगी की रिपोर्ट की। पुलिस ने राजू की पत्नी की निशानदेही पर किशोरी को बरामद किया। किशोरी की बरामदगी के बाद मेडिकल जांच में किशोरी करीब 2 महीने की गर्भवती मिली। कोर्ट के आदेश पर गर्भपात कराया गया और भ्रूण को सुरक्षित रखकर FSL भेजा गया।
DNA रिपोर्ट ने बदली कहानी
29 अगस्त को आई FSL रिपोर्ट में बड़ा मोड़ आया। DNA जांच में राजू जाटव भ्रूण का जैविक पिता नहीं पाया गया।अब कोर्ट में किशोरी ने राजू द्वारा दुष्कर्म से इनकार कर दिया, जबकि पुलिस के सामने दर्ज बयानों में उसने राजू पर ही जबरन दुष्कर्म का आरोप लगाया था। बयानों के इस विरोधाभास के बाद ही हाईकोर्ट ने SIT जांच जरूरी समझी।
धाम की अपील
3 अक्टूबर की रात बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भी श्रद्धालुओं से अपील की थी कि महिलाएं और माताएं अकेले धाम न आएं और अनजान लोगों व सेवादारों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। हालांकि उन्होंने इस केस का सीधा जिक्र नहीं किया।

